विशाखापत्तनम स्टील प्लांट हादसे पर श्रमिक संगठनों का बयान
राष्ट्रीय खबर
विशाखापत्तनमः आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में एक अभूतपूर्व और रोंगटे खड़े कर देने वाला औद्योगिक हादसा सामने आया है। प्लांट के भीतर हुए एक भीषण और जोरदार धमाके ने पूरी फैक्टरी को हिलाकर रख दिया। इस दर्दनाक दुर्घटना में वहां काम कर रहे आठ श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इस दुर्घटना के बाद स्टील प्लांट के श्रमिक संघों ने प्रबंधन की लापरवाही को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। श्रमिक संघों का दावा है कि भारतीय इस्पात उद्योग के इतिहास में यह अपनी तरह की पहली और बेहद दुर्लभ घटना है, जब किसी संयंत्र के भीतर करछुल (लैडल) में रखा खौलता हुआ पिघला हुआ स्टील अचानक किसी बम की तरह फट गया हो। तकनीकी विशेषज्ञों और यूनियनों के अनुसार, सामान्य तौर पर तापमान असंतुलन या तकनीकी खराबी के कारण करछुल से पिघले हुए स्टील का रिसाव (लीकेज) तो होता है, लेकिन उसमें कभी इस तरह का भयानक विस्फोट नहीं देखा गया।
श्रमिकों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्टील प्रोसेसिंग (इस्पात शोधन) की प्रक्रिया के दौरान भारी मुनाफे के चक्कर में बेहद घटिया गुणवत्ता वाले रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन सब-स्टैंडर्ड रसायनों के उपयोग के कारण थर्मल और केमिकल रिएक्शन (रासायनिक प्रतिक्रिया) अनियंत्रित हो गई और इसी के चलते यह जानलेवा धमाका हुआ। कर्मचारियों ने सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठाते हुए शिकायत की कि पिछले महज दो महीनों के भीतर ही करछुल से खौलता हुआ स्टील लीक होने की 27 से अधिक घटनाएं दर्ज की जा चुकी थीं। हालांकि, उन मौकों पर कर्मचारियों की सतर्कता और किस्मत के चलते वे किसी बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए थे, लेकिन प्रबंधन ने इन चेतावनियों से कोई सबक नहीं लिया।
इस बेहद संवेदनशील मामले पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय इस्पात मंत्रालय ने एक आधिकारिक तकनीकी बयान जारी किया है। मंत्रालय के अनुसार, जब यह दर्दनाक हादसा हुआ, उस समय स्टील मेल्ट शॉप-1 के कास्टर-2 पर नियमित रूप से कास्टिंग का काम चल रहा था। प्रक्रिया के तहत, करछुल में भरे अत्यधिक गर्म कच्चे लिक्विड स्टील को आगे की कास्टिंग प्रक्रिया के लिए टुंडिश (एक विशेष तश्तरीनुमा पात्र) में डाला जाना था। लेकिन, जैसे ही इसके लिए स्लाइड गेट को खोलने की तैयारी की जा रही थी, ठीक उसी पल अचानक एक भीषण और तीव्र विस्फोट हो गया।
धमाका इतना जबरदस्त था कि आग का एक विशाल और भयावह गोला सीधे स्टील मेल्ट शॉप की ऊंची छत को चीरता हुआ ऊपर उठ गया। इस आग की लपटों ने वहां ऊपर मौजूद भारी-भरकम ओवरहेड क्रेन-2 को तुरंत अपनी चपेट में ले लिया। विस्फोट के भीषण दबाव और आग के कारण भारी करछुल को थामे रखने वाली मुख्य क्रेन अचानक बीच से टूट गई। क्रेन के टूटते ही उसमें भरा हुआ लगभग 1,500 से 1,600 डिग्री सेल्सियस के अत्यधिक ऊंचे तापमान पर उबलता और धधकता हुआ पिघला हुआ स्टील सीधे मेल्ट शॉप के फर्श पर आ गिरा। फर्श पर काम कर रहे कई असहाय मजदूर इस खौलते हुए लावेनुमा स्टील की सीधी चपेट में आ गए और उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला, जिससे वे जिंदा जल गए। इस हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों और संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता की जांच पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।