मणिपुर में दिनोंदिन हालात पहले जैसे ही बिगड़ते जा रहे हैं
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटीः मणिपुर के अशांत सीमावर्ती क्षेत्रों से आ रही खबरें एक बार फिर कानून-व्यवस्था और स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। राज्य के कांगपोकपी जिले से मिली हालिया जमीनी रिपोर्टों के अनुसार, पोंगिंगलोंग और पोंडाइजंग गांवों के मध्यवर्ती इलाके में एक बेहद दुखद और तनावपूर्ण घटना सामने आई है।
यहाँ दैनिक उपयोग के लिए जंगलों से जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करने गए रोंगमेई नागा समुदाय के निर्दोष ग्रामीणों पर अचानक अज्ञात हथियारबंद तत्वों द्वारा हमला कर दिया गया। इस अप्रत्याशित हिंसक घटना ने शांति की ओर बढ़ रहे इस पूरे क्षेत्र में नए सिरे से भारी तनाव और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे स्थानीय निवासियों में गहरा खौफ है।
इस बर्बर हमले के दौरान अफरा-तफरी के बीच एक 57 वर्षीय स्थानीय ग्रामीण, जिनकी पहचान चुंजांगलुंग पामेई के रूप में की गई है, अचानक लापता हो गए थे। हमले के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और सुरक्षाबलों द्वारा शुरू किए गए गहन खोज अभियान के बाद उनका शव बरामद किया गया। शुरुआती जांच और चश्मदीदों के अनुसार, मृतक के शरीर पर गोलियों के कई स्पष्ट और गहरे घाव पाए गए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि उनकी हत्या बेहद करीब से गोली मारकर की गई है। इस दुखद बरामदगी के बाद से ही क्षेत्र में आक्रोश और शोक की लहर है।
इस जघन्य हत्याकांड पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पोंगिंगलोंग यूथ क्लब ने एक आधिकारिक और विस्तृत लिखित बयान जारी किया है। यूथ क्लब ने खुलासा किया कि दिवंगत चुंजांगलुंग पामेई केवल एक साधारण ग्रामीण नहीं थे, बल्कि वे अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध पोंगिंगलोंग पार्ट-1 के एक सक्रिय विलेज गार्ड (ग्राम रक्षक) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
वे इसी सुरक्षा दायित्व के दौरान अचानक हुए हमले के बाद से लापता थे। यूथ क्लब ने प्रशासन को चेताते हुए कहा कि जिस रहस्यमय और हिंसक परिस्थितियों में यह मौत हुई है, वह सामाजिक ताने-बाने और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने के बजाय सक्षम और उच्च स्तरीय अधिकारियों की देखरेख में एक त्वरित, पारदर्शी और पूरी तरह से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि दोषियों को बेनकाब किया जा सके।
इस घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए आदिवासी समुदायों के शीर्ष संगठन जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल ने भी इस पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। काउंसिल ने नागरिक सुरक्षा में चूक का आरोप लगाते हुए दावा किया कि यह कोई अचानक हुई झड़प नहीं थी, बल्कि शांतिपूर्ण रोंगमेई नागा ग्रामीणों को एक सोची-समझी रणनीति के तहत नियोजित और दुर्भावनापूर्ण हमले का शिकार बनाया गया है।
काउंसिल ने इस बात पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है कि यदि विलेज गार्ड ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। उन्होंने राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से अपील की है कि वे क्षेत्र में अतिरिक्त बलों की तैनाती करें ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय और सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाली घटना की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।