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भूपेंद्र यादव के घऱ जुटे थे टीएमसी के सांसद

बंगाल के बाद अब बंगाल का ऑपरेशन लोट्स दिल्ली में

  • सोशल मीडिया में फोटो लीक किया गया

  • सिर्फ आठ सांसद ही इसमें नजर आये हैं

  • औपचारिक बयान से कन्नी काट रहे हैं सभी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने का ऑपरेशन लोट्स अब बंगाल से आगे निकलकर नईदिल्ली पहुंच गया है। यहां ममता बनर्जी के होने के दौरान ही सोशल मीडिया में एक फोटो जारी हो गया, जिसमें पता चलता है कि टीएमसी के कई सांसद भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के घर पर बैठक कर रहे थे। इस बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की उपस्थिति ने राज्य की राजनीति का पारा और बढ़ा दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तृणमूल के संसदीय दल में टूट की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है।

सूत्रों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण बैठक में तृणमूल के कुल 11 लोकसभा सांसद शामिल हुए। बैठक में मौजूद प्रमुख नामों में बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार, हावड़ा के प्रसून बनर्जी, बीरभूम की शताब्दी रॉय, बोलपुर के असित मल, मथुरापुर के बापी हलदर, मेदिनीपुर की जून मालिया, कूचबिहार के जगदीश चंद्र वर्मा बसुनिया, झाड़ग्राम के कालीपद सोरेन, बांकुड़ा के अरूप चक्रवर्ती, बैरकपुर के पार्थ भौमिक और बर्धमान पूर्व की सांसद शर्मिला सरकार शामिल हैं। इनके अलावा, हाल ही में तृणमूल और राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले अनुभवी नेता सुखेंदु शेखर रॉय भी इस बैठक में उपस्थित थे।लेकिन फोटो में सिर्फ आठ सांसद ही नजर आ रहे हैं।

भूपेंद्र यादव, जो केंद्रीय पर्यावरण मंत्री होने के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक भी हैं, को 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है। संयोग देखिए कि जिस समय दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने के लिए बैठक कर रहे थे, ठीक उसी समय उनके सांसद दूसरी ओर भाजपा के साथ नई राजनीतिक दिशा तय करने में जुटे थे।

हालांकि आधिकारिक रूप से अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितने सांसद भाजपा के संपर्क में हैं, लेकिन सूत्रों का दावा है कि बैठक में शामिल 11 सांसदों के अलावा भी कई अन्य तृणमूल नेता भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं। यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी के भीतर बगावत अब खुलकर सामने आ गई है और संसदीय दल में विभाजन लगभग सुनिश्चित हो गया है। दूसरी तरफ ममता के विश्वासपात्र मान रहे हैं कि यह माहौल बनाने की साजिश भर है क्योंकि ऐसे लोगों के पास दल के विभाजन के लायक संख्याबल ही नहीं है।