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ईरान ने पड़ोसी देशों को कड़ी चेतावनी दी

अमेरिकी की हमले में मदद की तो अंजाम बुरा होगा

एजेंसियां

तेहरानः ईरान ने एक बार फिर अपने पड़ोसी देशों को चेतावनी दी है कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित अमेरिकी सैन्य अभियान के लिए अपनी ज़मीन का इस्तेमाल न करने दें। शनिवार को जारी एक बयान में ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा, क्षेत्र के देशों को अच्छे पड़ोसी होने के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए और अपनी जमीन का उपयोग ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई के लिए नहीं करना चाहिए। यह चेतावनी शनिवार तड़के ईरान के दक्षिणी क्षेत्र सिरीक और केश्म द्वीप पर स्थित रडार प्रतिष्ठानों पर हुए अमेरिकी हमलों के मद्देनजर आई है।

ईरानी मंत्रालय ने इन हमलों को अप्रैल 2026 में हुए युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन और ईरान की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ सैन्य आक्रामकता करार दिया है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इन अवैध अमेरिकी कार्रवाइयों का संज्ञान लेने और जवाब देने का आग्रह किया है। ईरान का तर्क है कि ये घटनाएं न केवल क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं।

उल्लेखनीय है कि इजराइल और अमेरिका ने तीन महीने पहले ईरान पर हमला किया था। तकनीकी रूप से 8 अप्रैल से युद्ध के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन इसके बावजूद दोनों तरफ से जवाबी हमले जारी हैं। तनावपूर्ण स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन की ओर दागी गई कई मिसाइलों को रोक लिया है।

ये दोनों खाड़ी देश अमेरिका के सहयोगी हैं। इससे पहले, अमेरिकी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में चार ईरानी ड्रोनों को मार गिराने की खबरें भी सामने आई थीं, जिसके बाद ही ईरान के केश्म द्वीप और गोरुक शहर में रडार स्टेशनों पर हमले किए गए। यह स्थिति मध्य-पूर्व में एक बार फिर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को दर्शाती है, जहाँ कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद सैन्य संघर्ष कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।