खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हमलों से दहला ईरान का रडार तंत्र
एजेंसियां
कुवैतः मध्य-पूर्व के तनावपूर्ण क्षेत्र में संघर्ष का एक नया और खतरनाक अध्याय शुरू हो गया है। हालिया घटनाक्रम में, अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत करते हुए ईरान के तटीय निगरानी रडार साइटों को निशाना बनाया है। पेंटागन के अनुसार, ये हमले ईरान के कशम द्वीप और गोरुक में स्थित उन ठिकानों पर किए गए, जिन्हें क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों की निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके अलावा, अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर भेजे गए चार ईरानी ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट कर दिया।
इस सैन्य कार्रवाई के कुछ ही समय बाद, कुवैत की ओर से भी हमले की खबरें आईं। कुवैती सैन्य प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि उनके वायु रक्षा तंत्र ने देश की ओर आ रही मिसाइलों और ड्रोन्स को इंटरसेप्ट किया है। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि आसमान में सुनाई देने वाले धमाके असल में इन्हीं रक्षात्मक प्रहारों के परिणाम थे, जिससे कुवैत पर मंडरा रहे खतरे को बेअसर करने का प्रयास किया गया।
दूसरी ओर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इन हमलों को दुश्मन के अड्डों पर की गई जवाबी कार्रवाई करार दिया है। अर्ध-आधिकारिक समाचार एजेंसी तस्नीम के माध्यम से जारी बयान में IRGC ने दावा किया कि उन्होंने एयरोस्पेस मिसाइलों का उपयोग करते हुए अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। यह कार्रवाई ईरान के सिरीक शहर और कशम द्वीप पर कथित अमेरिकी आक्रामकता के विरोध में की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में सत्ता का केंद्र अब राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की नागरिक सरकार से हटकर आईआरजीसी के हाथों में केंद्रित हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आम जनता की जरूरतों को पूरा करने के बढ़ते दबाव के कारण रिवोल्यूशनरी गार्ड अब केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहना चाहते। तेहरान में मौजूदा माहौल इस बात का संकेत है कि ईरान को अमेरिकी प्रस्तावों या कूटनीति पर भरोसा नहीं है। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि अमेरिका के साथ बातचीत केवल धोखा है। होर्मुज जलडमरूमध्य फिलहाल इस पूरे संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। अमेरिका जहां इस क्षेत्र में स्वतंत्र नौवहन की वकालत कर रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी रणनीतिक ताकत का मुख्य आधार मानते हुए अपना नियंत्रण छोड़ने को तैयार नहीं है। इस क्षेत्र में छिटपुट झड़पें और परस्पर आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला आने वाले समय में बड़े संघर्ष की आहट दे रहा है।