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Deoghar Mango Farming: देवघर में आम की बागवानी से बदली महिलाओं की किस्मत; जेएसएलपीएस और मनरेगा का मिला साथ

झारखंड का देवघर जिला अब बाबा नगरी के साथ-साथ आम की बागवानी (Mango Farming) के क्षेत्र में भी अपनी एक नई और विशिष्ट पहचान बनाता जा रहा है. यहाँ की ग्रामीण महिलाएं झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़कर आम की उन्नत बागवानी कर रही हैं. ये जाबांज महिलाएं न केवल स्थानीय स्तर पर देवघर शहर की मीठे आमों की मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर रही हैं, बल्कि अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने परिवार की मासिक आय भी बढ़ा रही हैं. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ के तहत वर्ष 2018 में इन महिलाओं को प्रति एकड़ 112 आम के उन्नत पौधे उपलब्ध कराए गए थे. इसके साथ ही मनरेगा (MGNREGA) के माध्यम से भी महिलाओं को गड्ढे खोदने, सिंचाई और बागवानी प्रबंधन में वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है.

🌱 बंजर मिट्टी और सूखे पौधों की चुनौतियों को दी मात: रिखिया क्षेत्र के हिंदणा पूर्वी गांव के बागानों में लदे रसीले आम

शुरुआती दौर में इन महिलाओं के लिए यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था. शुरुआत में क्षेत्र की खराब और पथरीली मिट्टी, तकनीकी जानकारी के अभाव में पौधों के सूखने और उम्मीद से कम उत्पादन जैसी कई गंभीर कृषि चुनौतियां सामने आईं, लेकिन देवघर की इन दीदियों ने कभी हार नहीं मानी. उनके लगातार और भगीरथ प्रयासों का ही सुखद परिणाम है कि आज उनके बागानों में पेड़ों पर रसीले आम लदे हुए हैं. रिखिया क्षेत्र के हिंदणा पूर्वी गांव की महिला किसानों ने बताया कि इस वर्ष पहली बार उन्हें अपने बगीचे के आम सीधे बाजार में बेचकर अच्छी आय अर्जित करने का सुनहरा अवसर मिला है. पहले उन्हें जानकारी के अभाव में अपने बागान के आम स्थानीय बिचौलियों और व्यापारियों को बेहद कम कीमत पर मजबूरी में बेचने पड़ते थे, जिससे लागत भी नहीं निकल पाती थी.

🛍️ जिला प्रशासन ने लगवाए विशेष बिक्री स्टॉल: महिलाएं रोज़ाना कमा रही हैं ₹1200 तक, अब की स्थायी बाजार की मांग

महिलाओं को बिचौलियों के शोषण से बचाने के लिए इस बार देवघर जिला प्रशासन की ओर से विभिन्न प्रखंडों (Blocks) और मुख्य चौराहों पर विशेष सरकारी बिक्री स्टॉल लगाए गए हैं. इन स्टॉलों के माध्यम से महिलाएं बिना किसी कमीशन के सीधे ग्राहकों को आम बेचकर प्रतिदिन 1000 से 1200 रुपये तक की शुद्ध आमदनी कर रही हैं. महिलाओं ने गर्व से बताया कि इस कृषि आधारित उद्यम ने उन्हें स्वरोजगार के नए पंख दिए हैं. पेड़ों से आम तोड़ने से लेकर, उन्हें सुरक्षित क्रेड्स में पैक करने, बाजार तक वाहन से पहुंचाने और खुद काउंटर पर बैठकर बिक्री करने की पूरी जिम्मेदारी ये महिलाएं स्वयं बखूबी निभा रही हैं. हालांकि, महिलाओं ने यह मांग भी उठाई है कि वर्तमान में उन्हें अस्थाई स्टॉल लगाने पड़ते हैं, यदि सरकार उन्हें शहर में एक ‘स्थायी मार्केट’ (Permanent Market) उपलब्ध करा दे, तो उनका यह कारोबार बारहमासी रूप ले सकता है.

🤝 जेएसएलपीएस (JSLPS) ने निभाई मेंटर की भूमिका: डीपीएम सुशील दास बोले—’3000 महिलाओं का नेटवर्क हुआ तैयार’

ग्रामीण महिलाओं को कुशल और व्यावसायिक उद्यमी बनाने में जेएसएलपीएस (JSLPS) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है. जेएसएलपीएस के डीपीएम (DPM) सुशील दास ने बताया कि देवघर की भौगोलिक स्थिति में आम की व्यावसायिक बागवानी करना महिलाओं के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन, खाद-पानी के सही उपयोग और प्रशासनिक सहयोग से आज 100 से अधिक दीदियां शहर के विभिन्न वीआईपी स्थानों पर गर्व से स्टॉल लगाकर आम बेच रही हैं. आने वाले दिनों में मांग को देखते हुए ऐसे स्टालों की संख्या और बढ़ाई जाएगी. उन्होंने आंकड़ों के हवाले से बताया कि वर्ष 2018 से अब तक जिले की करीब 3000 महिलाओं को इस योजना से जोड़ा जा चुका है, जिनमें से लगभग 500 महिलाएं पूरी तरह सक्रिय रूप से आम उत्पादन और सफल मार्केटिंग के माध्यम से अपने परिवार की रीढ़ बन चुकी हैं.

📈 देवघर के आम को मिलेगी देशव्यापी पहचान: उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया और डीडीसी पीयूष सिन्हा ने दी उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं

ग्रामीण महिलाओं की इस ऐतिहासिक और अद्वितीय सफलता की सराहना करते हुए देवघर के उपायुक्त (DC) सौरभ कुमार भुवानिया और उप विकास आयुक्त (DDC) पीयूष सिन्हा ने संयुक्त रूप से कहा कि इन महिला किसानों ने जिले का मान बढ़ाया है. जिला प्रशासन भविष्य में इन दीदियों को और बेहतर कस्टमाइज्ड बाजार, कोल्ड स्टोरेज की सुविधा और पैकेजिंग यूनिट उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. प्रशासन का मुख्य लक्ष्य यह है कि आने वाले समय में देवघर की पहचान केवल राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि मालदा, जर्दालू और आम्रपाली जैसी उन्नत किस्मों के उत्पादन के लिए पूरे देश के कृषि मानचित्र पर स्थापित हो सके.