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समंदर का खारा पानी साफ करने की नई तकनीक बनी

बिना जहरीले ब्राइन का मिलेगा शुद्ध जल

  • यह विधि बहुत सस्ती साबित हुई

  • रोचेस्टर विश्वविद्यालय में शोध

  • सौर ऊर्जा की मदद से होगा काम

राष्ट्रीय खबर

रांचीः संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, आज भी दुनिया की एक बड़ी आबादी—लगभग 2.2 अरब लोग—सुरक्षित पेयजल से वंचित हैं। कैलिफोर्निया से लेकर मध्य पूर्व तक के कई क्षेत्र अपनी बढ़ती पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिसेलिनेशन (विलवणीकरण) संयंत्रों पर निर्भर हैं, जो समुद्री खारे पानी को मीठे पानी में बदलते हैं।

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पारंपरिक विलवणीकरण विधियाँ, जैसे रिवर्स ऑस्मोसिस और थर्मल डिस्टिलेशन, काफी महंगी और ऊर्जा की खपत वाली होती हैं। इनमें पानी को प्रोसेस करने से पहले और बाद में रसायनों की आवश्यकता होती है, और इस प्रक्रिया में ब्राइन (अत्यधिक सांद्रित खारा पानी) का भारी मात्रा में उत्पादन होता है। जब ब्राइन को वापस समुद्र में छोड़ा जाता है, तो यह खारापन बढ़ाकर और ऑक्सीजन का स्तर घटाकर समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुँचाता है।

रोचेस्टर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक विकसित की है जो इन चुनौतियों का समाधान कर सकती है। यह सौर ऊर्जा संचालित प्रणाली कुशलतापूर्वक मीठा पानी बनाती है, इसमें किसी रासायनिक उपचार की आवश्यकता नहीं होती और यह ब्राइन अपशिष्ट भी पैदा नहीं करती। इस शोध का नेतृत्व भौतिकी और प्रकाशिकी के प्रोफेसर चुनलेई गुओ ने किया।

लेजर-ट्रीटेड सोलर पैनल यह सिस्टम विशेष रूप से इंजीनियर किए गए सोलर पैनलों पर काम करता है, जो फेमटोसेकंड लेजर से टेक्सचर किए गए ब्लैक मेटल से बने हैं। यह सतह लगभग सभी आने वाले सूर्य के प्रकाश को सोख लेती है और सुपरविकिंग नामक गुण के कारण पानी को तेजी से अपनी ओर खींचती है। पैनल का लेजर-पैटर्न वाला सक्रिय क्षेत्र समुद्री पानी की एक पतली परत खींचता है, जो सूर्य की गर्मी से भाप बनकर शुद्ध पानी में बदल जाता है। साथ ही, घुले हुए नमक और खनिज सक्रिय क्षेत्र से दूर धकेल दिए जाते हैं।

कॉफी रिंग इफेक्ट से रुकावटों का समाधान समुद्री पानी में केवल सोडियम क्लोराइड ही नहीं, बल्कि मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे तत्व भी होते हैं जो सख्त पपड़ी जमा देते हैं। इसे रोकने के लिए शोधकर्ताओं ने सतह पर सूक्ष्म खांचे बनाए हैं। टीम ने कॉफी रिंग इफेक्ट (जैसा कि कॉफी गिरने पर सूखने के बाद किनारे पर निशान छोड़ती है) के सिद्धांत का उपयोग करके नमक को सक्रिय क्षेत्र से बाहर धकेला। प्रयोगों में यह सतह खुद को प्रभावी ढंग से साफ करती पाई गई।

इस प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह नमक को ठोस रूप में बरामद करती है। इसे न केवल खाने योग्य नमक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, बल्कि इससे लिथियम जैसे कीमती खनिज भी निकाले जा सकते हैं, जो ईवी बैटरी के लिए जरूरी हैं। शोधकर्ताओं ने यूटा की ग्रेट साल्ट लेक के पानी से 50 फीसद तक लिथियम निकालने में सफलता प्राप्त की है। यह तकनीक भविष्य में बड़े पैमाने पर पेयजल की किल्लत और खनिज संसाधनों की कमी दोनों को दूर करने में क्रांतिकारी साबित हो सकती है।

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