Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Gwalior Music Heritage Row: हद्दू खां सभागार से ध्रुपद केंद्र हटाने का प्रस्ताव खारिज; सदन में हुआ ज... Shivpuri News: छात्रावास की छात्राओं का फूटा गुस्सा; दूषित भोजन और बदहाल सुविधाओं को लेकर पहुंचीं कल... MP Govt News: सरकारी नौकरी के लिए 'दो बच्चों' की सीमा खत्म; मोहन सरकार का बड़ा फैसला, कर्मचारियों को ... Chhindwara Industrial Land Row: 1200 एकड़ जमीन पर उद्योग या किसानों को वापसी; सांसद बंटी साहू ने सीए... Mandla Bus Accident: बम्हनी बंजर में मजदूरों से भरी बस मकान में घुसी; ड्राइवर पर लगा नशे में होने का... MP Politics: 'अगले लोकसभा चुनाव में जीतेंगे सभी 29 सीटें'; पीएम मोदी के नेतृत्व पर सीएम मोहन यादव का... India's Smart Border: सीमाओं पर तैनात होगा स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम; अमित शाह ने कहा- 'अब कोई नहीं ... MP Rajya Sabha Election Row: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर अभिषेक मनु सिंघवी का वार; कहा- ... TMC Crisis: ममता बनर्जी की पार्टी में बढ़ती बगावत; सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद सियासी हलचल तेज Hardik Pandya Injury Update: फिटनेस टेस्ट पास करने के बाद हार्दिक पंड्या फिर चोटिल; BCCI ने लिया बड़ा...

Nautapa 2026: कब से शुरू हो रहा है नौतपा? जानिए सूर्य देव की प्रचंडता के इन 9 दिनों का धार्मिक महत्व

सनातन हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष शास्त्र में नौतपा (Nautapa) का एक अत्यंत विशिष्ट और वैज्ञानिक महत्व माना गया है। धार्मिक दृष्टिकोण से नौतपा के इन नौ दिनों को बेहद पावन और साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, नौतपा का सीधा संबंध प्रत्यक्ष देवता सूर्य देव के रोहिणी नक्षत्र (Rohini Nakshatra) में गोचर से है। जब सूर्य देव भ्रमण करते हुए चंद्रमा के आधिपत्य वाले रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो उसी क्षण से नौतपा का प्रारंभ माना जाता है। इस खगोलीय घटना के दौरान सूर्य देव अपनी पूर्ण प्रचंड ऊर्जा और तपन के चरम पर होते हैं। इस विशेष अवधि में सूर्य की किरणें बिना किसी अवरोध के सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिसके परिणामस्वरूप उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में भयंकर और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ती है।

🗓️ 25 मई से 2 जून तक आग की तरह तपेगी धरती: केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि जप, तप और दान-पुण्य का है विशेष काल

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नौतपा का यह समय सिर्फ मौसम में आने वाले एक सामान्य चक्रवाती या ग्रीष्मकालीन बदलाव भर का संकेत नहीं देता है। इसके विपरीत, शास्त्रों में इसे कठिन आध्यात्मिक साधना, मंत्र जप, मानसिक तप और महा-दान का एक बेहद दुर्लभ व पुण्यकाल माना गया है। इस वर्ष नौतपा के इन नौ तपने वाले दिनों की शुरुआत आगामी 25 मई से होने जा रही है, जो निरंतर 2 जून तक विधिवत जारी रहेगी। इस पूरे कालखंड के दौरान धरती का तापमान अपने उच्चतम स्तर पर रहेगा और पृथ्वी आग की भट्टी की तरह तपेगी। यही वजह है कि प्रकृति के इस उग्र रूप के बीच सूर्य देव को शांत करने और उनकी कृपा पाने के लिए इन नौ दिनों में सूर्य उपासना का महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाता है।

🔱 आध्यात्मिक साधना और आत्मशुद्धि का पर्व है नौतपा: घड़े, सत्तू और छाते के दान से प्रसन्न होते हैं पितर देव

नौतपा के इस काल को मुख्य रूप से आध्यात्मिक चेतना को जगाने और आत्मशुद्धि (Self-Purification) का समय माना जाता है। इन 9 दिनों की भीषण तपन के बीच श्रद्धालु और साधक अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए विशेष पूजा-पाठ, व्रत और तपस्या करते हैं, जिससे उन्हें अक्षय पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। ऐसी प्रबल धार्मिक मान्यता है कि नौतपा के दौरान किया गया निस्वार्थ दान सीधे हमारे पितरों (Ancestors) तक पहुंचता है और उनकी दिव्य कृपा परिवार पर बरसती है। इस तपन भरे काल में सूर्य देव की नियमित आराधना करने के साथ-साथ जरूरतमंदों को सत्तू, मिट्टी का घड़ा (मटका), छाता, शीतल जल, हाथ का पंखा और अन्य शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुओं का दान करना शास्त्रों में परम कल्याणकारी और भाग्य जगाने वाला बताया गया है।

☀️ पृथ्वी के सबसे करीब होते हैं साक्षात सूर्य देव: सुबह स्नान के बाद अर्घ्य देने से मिलता है सुख-समृद्धि और आरोग्य का वरदान

पौराणिक कथाओं और ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार, नौतपा के इन नौ विशेष दिनों में सूर्य देव की पूजा का महत्व इसलिए सबसे ज्यादा प्रभावी हो जाता है, क्योंकि सूर्य देव इस समय अपनी संपूर्ण ऊर्जा, तेज और प्रचंडता के साथ पृथ्वी के सबसे निकटतम बिंदु पर स्थित होते हैं। इस खगोलीय निकटता के कारण सूर्य की पराबैंगनी और तीव्र किरणें सीधे भूभाग को प्रभावित करती हैं।

इस नकारात्मक प्रभाव से बचने और आंतरिक सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए श्रद्धालु प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं। इसके बाद तांबे के पात्र में लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर सूर्य देव को ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र के साथ जल (अर्घ्य) अर्पित करते हैं और अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि व दीर्घायु का आशीर्वाद मांगते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस संकट काल में सूर्य देव की अनन्य आराधना करने से नौ ग्रहों सहित सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद स्वतः ही प्राप्त हो जाता है, जिससे मनुष्य का मानसिक मनोबल ऊंचा रहता है और शारीरिक स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहता है।