Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
चिकित्सा क्षेत्र में आ सकती है बड़ी क्रांति, देखें वीडियो Super El Nino Impact: मई-जून में क्यों उबल रहा है देश? मौसम वैज्ञानिकों ने दी मानसून कमजोर होने और स... RG Kar Case: आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर नगर निगम का बड़ा एक्शन; अवैध घर गिराने का आदेश West Bengal Free Bus Scheme: बंगाल में 1 जून से महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा; इस तरह ... India-Bangladesh Border: भारत-बांग्लादेश सीमा पर अभेद्य सुरक्षा; BSF ने खुले हिस्सों में शुरू किया ब... Rajya Sabha Election 2026: 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर चुनाव का एलान; 18 जून को वोटिंग, खरगे-... Delhi Riots Case: उमर खालिद को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली 3 दिन की अंतरिम जमानत; मां की सर्जरी के लिए र... Mount Everest Tragedy: माउंट एवरेस्ट फतह करने के बाद 2 भारतीय पर्वतारोहियों की मौत; नीचे उतरते समय ह... Uttarakhand News: 'सड़कों पर नमाज़ बर्दाश्त नहीं, कानून का राज सर्वोपरि'—सीएम पुष्कर सिंह धामी का बड... Himachal School Bag Policy: हिमाचल में स्कूली बच्चों को भारी बस्ते से मुक्ति; शारीरिक वजन के 10% से ...

मोदी सरकार के पास मौलिक विचारों की भारी कमी

आर्थिक नीतियों में बड़े बदलाव की जरूरतः कांग्रेस

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश (कुमार) के जरिए चुनाव का प्रबंधन तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए तत्काल नए ज्ञान की आवश्यकता है।

कांग्रेस के महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर माहौल इस कदर बिगड़ चुका है कि अब मोदी सरकार के पेशेवर समर्थक और चीयरलीडर्स भी सार्वजनिक रूप से अपनी चिंताएं जाहिर करने लगे हैं।

जयराम रमेश ने आर्थिक संकेतकों का हवाला देते हुए कहा, देश में मुद्रास्फीति (महंगाई) के अनुमान तेजी से ऊपर जा रहे हैं, जबकि विकास दर के अनुमानों में भारी गिरावट देखी जा रही है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में लगातार कमी आ रही है और सप्लाई चेन का प्रबंधन इस कदर बिगड़ चुका है कि खुद प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रूप से उपभोक्ताओं से अपनी खपत कम करने की अपील करनी पड़ी है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से देश में निवेश के कमजोर माहौल को लेकर आवाज उठा रही है। प्रधानमंत्री मोदी और इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की एक हालिया तस्वीर का संदर्भ देते हुए रमेश ने तंज कसा कि जब देश के पैरों तले से जमीन खिसक रही है, तब प्रधानमंत्री टॉफियां बांटने और जनता से खोखली भावुक अपीलें करने में व्यस्त हैं।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि देश को इस समय आर्थिक नीति-निर्माण में एक आमूलचूल बदलाव की सख्त जरूरत है, लेकिन मोदी सरकार के पास आत्म-प्रशंसा के अलावा अब कोई नए विचार नहीं बचे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि जब तक निजी निवेश की दर में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं होती, तब तक आर्थिक विकास को गति देना असंभव है।

जयराम रमेश ने निजी निवेश न बढ़ने के पीछे मुख्य रूप से चार कारण गिनाए। देश में वास्तविक मजदूरी स्थिर हो गई है, जिससे हर आय वर्ग में खपत और मांग घट गई है। उपभोक्ता मांग के अभाव में भारतीय कॉर्पोरेट जगत के पास निवेश का कोई ठोस कारण नहीं है। नीतिगत पलटीमारियों, टैक्स नोटिसों, प्रशासनिक आदेशों और केंद्रीय जांच एजेंसियों की छापेमारी के डर से निवेश समुदाय में भारी अनिश्चितता व्याप्त है। चीन की औद्योगिक अति-क्षमता के कारण वहां से होने वाले सस्ते आयात की डंपिंग ने भारत के स्थानीय विनिर्माण क्षेत्र की मांग को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। सरकार की मदद से देश की संपत्तियों का स्वामित्व प्रधानमंत्री के करीबी मित्रों के हाथों में सिमटता जा रहा है। रमेश ने इसे चंदा लो, धंधा दो का व्यापारिक काउंटर करार दिया।

उन्होंने अंत में कहा कि कॉर्पोरेट टैक्स दरें रिकॉर्ड निचले स्तर पर हैं और कंपनियों का मुनाफा रिकॉर्ड ऊंचाई पर है, जिससे शेयर बाजार भले ही चमक रहा हो, लेकिन जमीन पर वास्तविक निवेश गायब है। जो लोग निवेश करने की स्थिति में हैं, वे भी बड़ी संख्या में विदेशों का रुख कर रहे हैं।