पाकिस्तान की मध्यस्था में युद्धविराम समझौते पर बात
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फिलहाल युद्धविराम के बाद भी बयानबाजी
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पाकिस्तान लगातार दोनों के संपर्क में है
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दोनों पक्षों के प्रस्तावों का आदान प्रदान
एजेंसियां
इस्लामाबादः पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आ रही है। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक स्थायी शांति समझौते के मसौदे (ड्राफ्ट एग्रीमेंट) को अंतिम रूप देने के लिए गंभीर राजनयिक प्रयास तेज हो गए हैं, जिसमें पड़ोसी देश पाकिस्तान एक बार फिर मध्यस्थता प्रक्रिया के केंद्र में उभरकर सामने आया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर जल्द ही ईरान की यात्रा कर सकते हैं, जहां वे वाशिंगटन और तेहरान के बीच अंतिम समझौता मसौदा तैयार होने की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हज सीजन की समाप्ति के बाद अगले दौर की औपचारिक बातचीत इस्लामाबाद में आयोजित होने की उम्मीद है। यह घटनाक्रम ईरान और अमेरिका के बीच अप्रैल महीने से लागू एक बेहद नाजुक संघर्ष विराम के दौरान हो रहा है। पिछले एक महीने से पाकिस्तान इस अस्थायी युद्धविराम को बनाए रखने और दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताओं को सुगम बनाने के लिए लगातार बैकचैनल सूत्रधार की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, इस प्रस्तावित यात्रा को लेकर अभी तक इस्लामाबाद या तेहरान द्वारा कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों धड़े एक बड़े समझौते के बेहद करीब हैं।
इस संभावित समझौते में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना, ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील देना, समुद्री सुरक्षा गारंटी और पूर्ण पैमाने पर युद्ध को रोकने के उपाय जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। इसी हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्वीकार किया था कि मध्यस्थों के माध्यम से तेहरान से मिले एक संशोधित प्रस्ताव के बाद उन्होंने ईरान पर होने वाले सैन्य हमलों को रोक दिया है। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे खाड़ी देशों के नेताओं ने उनसे कूटनीति को थोड़ा और समय देने का आग्रह किया था। दूसरी ओर, ईरान का रुख है कि किसी भी दीर्घकालिक समझौते के लिए प्रतिबंधों से राहत, उसकी फ्रीज की गई संपत्तियों की बहाली और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का खात्मा बेहद जरूरी है।
तनावपूर्ण कूटनीति के बीच दोनों ओर से तीखी बयानबाजी भी जारी है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी चेतावनी दी है कि यदि दोबारा युद्ध छिड़ा, तो यह मध्य पूर्व की सीमाओं को पार कर जाएगा। इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि इस दिशा में काफी अच्छी प्रगति हो रही है, हालांकि उन्होंने ईरान को यह चेतावनी भी दी कि अमेरिकी सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।