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कॉकरोच जनता पार्टी तो इंटरनेट पर छा गयी

सीजेआई की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया में तहलका

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा एक अदालती सुनवाई के दौरान कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के लिए कथित तौर पर कॉकरोच और परजीवी जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने के बाद देश के सोशल मीडिया पर एक अनोखा और तीखा विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है।

हालांकि सीजेआई ने बाद में स्पष्टीकरण जारी करते हुए अपने शब्द वापस ले लिए, लेकिन भारतीय इंटरनेट यूजर्स का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। इस बयान के विरोध में और देश के बेरोजगार युवाओं की आवाज उठाने के लिए इंटरनेट पर एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का गठन किया गया है, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है।

सीजेआई की इस विवादित टिप्पणी के ठीक एक दिन बाद, 15 मई को इस डिजिटल पार्टी की शुरुआत की गई थी। इसके संस्थापक अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) की पढ़ाई कर रहे 30 वर्षीय अभिजीत दिपके हैं। आमतौर पर सोशल मीडिया के ऐसे विवाद लोग जल्द ही भूल जाते हैं, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता देश के युवाओं में व्यवस्था और शीर्ष संस्थाओं के प्रति गहरे असंतोष और गुस्से को बयां कर रही है।

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कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट पर खुद को एक राजनीतिक व्यंग्य आंदोलन के रूप में पेश किया गया है, जिसकी टैगलाइन है—सुस्त और बेरोजगारों की आवाज। इसके संस्थापकों का कहना है कि यह पार्टी उन आम और परेशान नागरिकों का प्रतिनिधित्व करती है, जिन्हें यह सिस्टम गिनना ही भूल गया है।

इस पार्टी की सदस्यता उन सभी लोगों के लिए खुली है जो खुद को बेरोजगार, सुस्त या क्रोनिकली ऑनलाइन (हर वक्त इंटरनेट पर रहने वाले) मानते हैं और जो पेशेवर तरीके से व्यवस्था के खिलाफ अपनी भड़ास निकाल सकते हैं। सीजेपी ने अपने व्यंग्यात्मक घोषणापत्र में कुछ बेहद गंभीर और कड़े नीतिगत मुद्दों को भी शामिल किया है, जिनमें प्रमुख हैं:

मुख्य न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त (रिटायर) होने के बाद राज्यसभा पद या सरकारी नियुक्तियों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। पाला बदलने वाले (दलबदलू) विधायकों और सांसदों पर 20 साल के लिए चुनाव लड़ने का प्रतिबंध हो।  केंद्रीय कैबिनेट के पदों पर महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। यह मांग भी की गयी है कि मुख्यधारा के कुछ खास मीडिया एंकरों के बैंक खातों की जांच हो। नीट जैसी परीक्षाओं की विसंगतियों के शिकार छात्रों को न्याय मिले और सीबीएसई की री-चेकिंग फीस को खत्म किया जाए।

शुरुआत के महज तीन दिनों के भीतर इस व्यंग्यात्मक पार्टी से एक लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं, जिसमें तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद जैसे प्रमुख राजनेता भी शामिल हो गए हैं। सीजेआई के इस स्पष्टीकरण के बावजूद, इंटरनेट पर कॉकरोच पहचान को अपनाकर युवाओं का यह अनूठा डिजिटल विद्रोह लगातार मजबूत होता जा रहा है।