मणिपुर में जारी तनाव और संघर्ष के बीच नई पहल
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राज्य में पूर्ण बंदी से काफी नुकसान
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आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित
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कुकी और नागा समुदाय के बीच तनाव
उत्तर पूर्व संवाददाता
गुवाहाटीः पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में बीते कई महीनों से जारी जातीय अशांति और हालिया तनाव के बीच शांति बहाली के प्रयास एक बार फिर तेज हो गए हैं। राज्य में घोषित पूर्ण बंद और प्रमुख राजमार्गों पर की गई आर्थिक नाकेबंदी के कारण आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप होने से आम नागरिकों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इसी संकटपूर्ण स्थिति के बीच, क्षेत्र के दो बेहद प्रभावशाली चर्च संगठनों ने आगे आते हुए संघर्ष से प्रभावित कुकी और नागा समुदायों के बीच मध्यस्थता करने और शांति वार्ता आयोजित करने की आधिकारिक पेशकश की है।
इस महत्वपूर्ण शांति पहल के तहत काउंसिल फॉर बैपटिस्ट चर्च इन नॉर्थ ईस्ट इंडिया और मणिपुर बैपटिस्ट कन्वेंशन का प्रतिनिधित्व करने वाले चर्च नेताओं के एक उच्च स्तरीय 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से उनके आधिकारिक निवास पर मुलाकात की।
इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के साथ दोनों प्रमुख आदिवासी समुदायों के बीच हाल ही में पैदा हुए गंभीर और तनावपूर्ण माहौल पर गहरी चिंता व्यक्त की। चर्च नेताओं ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि दोनों समुदायों में गहरा सामाजिक प्रभाव रखने के कारण उनका संगठन जमीन पर दोनों पक्षों को एक मेज पर लाने और संवाद स्थापित करने की अनूठी क्षमता रखता है। बातचीत के दौरान राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने, आर्थिक नाकेबंदी को जल्द से जल्द समाप्त करवाने और दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने के लिए व्यावहारिक उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने चर्च संगठनों की इस स्वैच्छिक पहल का स्वागत किया और राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मणिपुर के इस बेहद संवेदनशील दौर में, जहां प्रशासनिक प्रयास चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं द्वारा की गई यह मध्यस्थता की पेशकश राज्य में स्थाई शांति और भाईचारा स्थापित करने की दिशा में एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।