मोदी सरकार पर नये सिरे से मेहरबानी की तैयारी
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आगामी 22 मई को इसकी बैठक होगी
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बैंक का लाभांश सरकार को मिलता है
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पिछले साल 2.68 लाख करोड़ रुपये दिये
राष्ट्रीय खबर
मुंबई: आर्थिक मामलों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक का केंद्रीय बोर्ड वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार को एक रिकॉर्ड अधिशेष (सरप्लस) हस्तांतरण पर विचार करने के लिए 22 मई को बैठक करेगा। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि यह अधिशेष हस्तांतरण — जिसे आमतौर पर सरकार को दिया जाने वाला केंद्रीय बैंक का लाभांश (डिविडेंड) कहा जाता है — 2.7 लाख करोड़ रुपये से 3 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और केंद्रीय बैंक के अधिशेष हस्तांतरण से लाभांश के रूप में 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया है। पिछले साल आरबीआई ने 2.68 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए थे, जो उससे पिछले वर्ष की तुलना में 27 फीसद अधिक था।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि लाभांश भुगतान की इस मजबूत स्थिति को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप (फॉरेक्स इंटरवेंशन) और निवेश से होने वाली आय से समर्थन मिलने की उम्मीद है। वहीं, अगर आरबीआई अपने आकस्मिक जोखिम बफर (कंटिनजेंसी रिस्क बफर) को कम रखने का फैसला करता है, तो लाभांश की यह राशि अनुमान से भी अधिक हो सकती है। लाभांश की अंतिम राशि शुक्रवार को मुंबई में होने वाली आरबीआई बोर्ड की बैठक में तय की जाएगी।
आरबीआई के इस बड़े लाभांश से सरकार के गैर-कर राजस्व को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय घाटे (फिस्कल डेफिसिट) को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। अधिशेष हस्तांतरण का यह निर्णय आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड द्वारा स्वीकृत संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचे के तहत लिया जाएगा। इस नियम के अनुसार, आकस्मिक जोखिम बफर को आरबीआई की बैलेंस शीट के 4.5 फीसद से 7.5 फीसद के दायरे में बनाए रखना होता है।