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सेमीकंडक्टर से ग्रीन हाइड्रोजन तक पर मोदी की पहल

भारत के फायदे के अनेक रणनीतिक साझेदारी पर सहमति

  • वहां के राजा और रानी से भेंट भी हुई

  • वैश्विक तेल संकट से उबरने की पहल

  • देश में हुए विकास की जानकारी भी दी

एजेंसियां

हेगः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक नए और ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयानों के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, उच्च प्रौद्योगिकी (हाई-टेक), शिक्षा, सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) और रणनीतिक सहयोग जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी संबंधों को एक नई दिशा और अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करना था। वर्तमान वैश्विक और भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए, इस कूटनीतिक यात्रा के दूरगामी परिणाम सामने आने की उम्मीद है।

यात्रा की शुरुआत और शुरुआती कूटनीतिक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बताया कि अपने व्यस्त कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने नीदरलैंड के सम्राट किंग विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से एक सौहार्दपूर्ण शिष्टाचार भेंट की।

इस उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में भारत के भीतर हुए व्यापक संरचनात्मक, प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों को दुनिया के सामने साझा किया। इसके साथ ही, उन्होंने देश में जमीनी स्तर पर आए विभिन्न परिवर्तनकारी बदलावों पर भी विस्तार से चर्चा की।

दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने अब तक के द्विपक्षीय संबंधों की निरंतर प्रगति और विकास पर गहरा संतोष और प्रसन्नता व्यक्त की। दोनों पक्षों के बीच इस बात पर पूर्ण सहमति बनी कि इन संबंधों को केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित न रखकर, भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप और अधिक व्यावहारिक और मजबूत बनाने के नए रास्तों को तलाशा जाए।

प्रधानमंत्री की इस यात्रा के जो सबसे प्रमुख और रणनीतिक स्तंभ उभरकर सामने आए हैं, उनमें पहला है सेमीकंडक्टर और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया सेमीकंडक्टर चिप्स की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला के लिए संघर्ष कर रही है, भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए तेजी से प्रयास कर रहा है। नीदरलैंड, विशेष रूप से उन्नत लिथोग्राफी तकनीकों में, वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी शक्ति माना जाता है। ऐसे में भारत के घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए डच निवेश और अत्याधुनिक तकनीकी हस्तांतरण को आकर्षित करना इस यात्रा का एक बड़ा उद्देश्य रहा है।

दूसरा अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र ग्रीन हाइड्रोजन और सतत विकास का है। जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों से निपटने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों ने मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। नीदरलैंड के पास नवीकरणीय ऊर्जा और अत्याधुनिक लॉजिस्टिक्स का बेहतरीन बुनियादी ढांचा मौजूद है, जबकि भारत दुनिया में ग्रीन हाइड्रोजन का एक प्रमुख वैश्विक उत्पादक और निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, कुशल भंडारण और सुरक्षित परिवहन के क्षेत्र में व्यापक तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। यह रणनीतिक कदम भारत के पर्यावरण-अनुकूल विकास और नेट-जीरो उत्सर्जन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को समय पर हासिल करने में एक बेहद मददगार और गेम-चेंजर साबित होगा।

संक्षेप में कहा जाए तो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह नीदरलैंड यात्रा केवल एक कूटनीतिक शिष्टाचार मात्र नहीं थी, बल्कि यह भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि की दिशा में दोनों देशों के साझा दृष्टिकोण और मजबूत इच्छाशक्ति को प्रदर्शित करने वाला एक ठोस और ऐतिहासिक कदम है।