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कांगो में तेजी से फैल रहा है इबोला का प्रकोप

अफ्रीका सीडीसी ने फिर से महामारी की पूर्व चेतावनी जारी की

एजेंसियां

कांगोः अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) ने शुक्रवार को बताया कि पूर्वी कांगो के एक सुदूर प्रांत में इबोला के नए प्रकोप की पुष्टि हुई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था के अनुसार, अब तक इसके 246 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और 65 लोगों की मौत हो चुकी है। इबोला वायरस बेहद संक्रामक है और यह उल्टी, रक्त या वीर्य जैसे शारीरिक तरल पदार्थों (बॉडी फ्लूइड्स) के संपर्क में आने से फैल सकता है। अफ्रीका सीडीसी ने बताया कि शुरुआती प्रयोगशाला परिणामों में जांचे गए 20 नमूनों में से 13 में इबोला वायरस की पुष्टि हुई है। जिस इतूरी प्रांत में ये मामले दर्ज किए गए हैं, वह कांगो की राजधानी किंशासा से 620 मील से भी अधिक दूर है और इसकी सीमाएं युगांडा तथा दक्षिण सूडान से लगती हैं, जिससे इसके अन्य देशों में फैलने का खतरा बढ़ गया है।

अफ्रीका सीडीसी के मुताबिक, ये मामले मुख्य रूप से मोंगवालु और र्वाम्परा स्वास्थ्य क्षेत्रों में दर्ज किए गए हैं। मोंगवालु एक खनन केंद्र (माइनिंग हब) है, जहां श्रमिकों का लगातार आना-जाना लगा रहता है। इतूरी प्रांत की राजधानी बुनिया और युगांडा सीमा के पास भी संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इसके अलावा, कांगो को पिछले एक साल में इतूरी प्रांत के कुछ हिस्सों में सशस्त्र समूहों के हमलों का सामना करना पड़ा है, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए हैं और हजारों विस्थापित हुए हैं। आतंकवादियों की मौजूदगी स्वास्थ्य कर्मियों के परीक्षण और संपर्क ट्रेसिंग (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) के प्रयासों में भी बाधा डाल सकती है। अफ्रीका सीडीसी ने कहा कि वह शुक्रवार को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और अन्य प्रमुख भागीदारों के साथ एक तत्काल उच्च स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित कर रहा है।

कांगो में पिछला इबोला प्रकोप 43 मौतों के बाद समाप्त घोषित होने के करीब पांच महीने बाद यह नया प्रकोप आया है। 1976 में पहली बार इस बीमारी के सामने आने के बाद से मध्य अफ्रीकी देश में यह 17वां प्रकोप है। पूर्वी कांगो में 2018 से 2020 तक चले इबोला प्रकोप में 1,000 से अधिक लोग मारे गए थे। इससे पहले 2014 से 2016 तक पश्चिम अफ्रीका में फैले प्रकोप में 11,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

इस प्रकोप में जिस स्ट्रेन की पहचान की गई है वह बुंडीबुग्यो इबोलावायरस है, जिसके कारण इससे पहले केवल दो ज्ञात प्रकोप हुए हैं। पिछले दोनों प्रकोप काफी छोटे थे: 2007 में युगांडा में 56 मामले और 2012 में कांगो में 57 मामले। गाउंडर ने कहा कि इस स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत टीके या उपचार उपलब्ध नहीं हैं। वर्तमान में उपलब्ध टीका जायरे स्ट्रेन के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, अभी हमारे पास जायरे स्ट्रेन के लिए उपचार और टीके हैं, लेकिन अन्य स्ट्रेन के लिए नहीं हैं।