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Shivpuri News: शिवपुरी में बुजुर्ग ने जिंदा रहते हुए ही की अपनी ‘तेरहवीं’ की तैयारी, कार्ड देख हैरान रह गए लोग

Shivpuri News: कहते हैं इंसान की मृत्यु के बाद उसके परिजन उसकी आत्मा की शांति के लिए मृत्यु भोज और त्रयोदशी (तेरहवीं) का आयोजन करते हैं. लेकिन मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सबको हैरान कर दिया है. यहां करैरा थाना क्षेत्र के ग्राम हाजीनगर में एक बुजुर्ग ने जिंदा रहते हुए ही अपनी खुद की 13वीं का आयोजन कर डाला है. बुजुर्ग कल्याण सिंह पाल द्वारा बांटे गए इस त्रयोदशी के निमंत्रण कार्ड ने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है.

✉️ मार्मिक पंक्तियों के साथ बांटे निमंत्रण कार्ड: “मेरी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था”

शनिवार, 16 मई 2026 को होने वाले इस अनोखे आयोजन के लिए बुजुर्ग ने बाकायदा कार्ड छपवाकर समाज और परिचितों में वितरित किए हैं. यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. कल्याण सिंह ने कार्ड के ऊपर बेहद मार्मिक पंक्तियां लिखवाई हैं- “मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था.” ये शब्द साफ इशारा कर रहे हैं कि बुजुर्ग अपने परिवार के व्यवहार से बुरी तरह टूट चुके हैं और यह कदम समाज की गिरती संवेदनाओं पर सवाल खड़े करता है.

💔 “भरोसा नहीं कोई बाद में रस्म निभाएगा या नहीं”: बुजुर्ग की बेबसी

जब इस अजीबोगरीब फैसले के बारे में खुद कल्याण सिंह पाल से बात की गई, तो उनकी बातों में नाराजगी और बेबसी दोनों झलक रही थी. उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि अब इस दुनिया में मेरा कोई नहीं है. उन्होंने आगे कहा, “मैं जीते-जी अपनी त्रयोदशी इसलिए कर रहा हूं क्योंकि मुझे भरोसा नहीं है कि मेरे मरने के बाद कोई यह रस्म निभाएगा भी या नहीं.” बुजुर्ग के इस बयान ने पारिवारिक रिश्तों के खोखलेपन को उजागर कर दिया है.

🏚️ पारिवारिक कलह बनी वजह: गांव में कौतूहल और दुख का माहौल

ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बुजुर्ग काफी समय से पारिवारिक कलह और अपनों की बेरुखी झेल रहे हैं. परिजनों से बढ़ती दूरियों के कारण ही उन्होंने यह कठोर निर्णय लिया है. फिलहाल, गांव में इस ‘जीवित त्रयोदशी’ की तैयारियों को लेकर कौतूहल और दुख दोनों का माहौल है. लोग हैरान हैं कि एक व्यक्ति को ऐसा कदम उठाने के लिए कितना मजबूर होना पड़ा होगा कि उसे मृत्यु पूर्व ही मृत्यु के बाद होने वाले संस्कारों की चिंता सताने लगी.

⚖️ समाज के लिए बड़ा सवाल: गिरती संवेदनाओं के बीच अकेला होता बुजुर्ग

कल्याण सिंह पाल का यह फैसला केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह बुजुर्गों के प्रति समाज और परिवार के बदलते नजरिए पर एक बड़ा प्रहार है. 16 मई को होने वाले इस आयोजन के लिए तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. पुलिस और प्रशासन की नजर भी इस मामले पर बनी हुई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने. फिलहाल हाजीनगर की यह घटना शिवपुरी ही नहीं बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है.