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एआईएडीएमके में स्पष्ट तौर पर विभाजन

पहले से चली आ रही राजनीतिक चर्चा सही साबित

  • विद्रोही गुट ने टीवीके को समर्थन दिया

  • पलानीस्वामी का विरोध चल रहा था

  • डीएमके के समर्थन पर आग भड़क गयी

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः तमिलनाडु की राजनीति में 12 मई 2026 का दिन एक बड़े सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक पुनर्गठन के गवाह के रूप में दर्ज हो गया है। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के भीतर लंबे समय से सुलग रही असंतोष की आग आखिरकार एक औपचारिक विभाजन के रूप में सामने आई। पूर्व मंत्रियों सी.वी. षणमुगम और एस.पी. वेलुमणि के नेतृत्व में पार्टी के एक बड़े बागी गुट ने नवनिर्मित तमिलगा वेत्री कड़गम सरकार को अपना पूर्ण समर्थन देने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

इस बगावत का मुख्य कारण पार्टी के भीतर वैचारिक मतभेद बताया जा रहा है। सी.वी. षणमुगम ने पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पलानीस्वामी मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल करने के लिए अपनी धुर विरोधी पार्टी डीएमके के साथ पर्दे के पीछे से समझौता करने को तैयार थे। षणमुगम ने स्पष्ट किया कि एआईएडीएमके की नींव ही डीएमके के विरोध पर रखी गई थी और पिछले 53 वर्षों से पार्टी का अस्तित्व इसी संघर्ष पर टिका है। उन्होंने कहा कि डीएमके के समर्थन से सरकार बनाने का प्रस्ताव पार्टी के अधिकांश सदस्यों और विधायकों को स्वीकार्य नहीं था, जिसके कारण उन्होंने अलग होने का निर्णय लिया।

विधानसभा में समीकरण और शक्ति प्रदर्शन यह घोषणा तमिलनाडु विधानसभा के उस सत्र के दौरान हुई जहाँ जेसीडी प्रभाकर को निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया था। इस बागी गुट में कथित तौर पर लगभग 30 विधायक शामिल हैं, जिन्होंने एस.पी. वेलुमणि को अपना विधायी नेता चुना है। इस समर्थन के बाद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की टीवीके सरकार को सदन में भारी बहुमत प्राप्त हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले मूल धड़े के पास अब केवल 17 विधायकों का समर्थन बचा है, जिससे विधानसभा में एआईएडीएमके की स्थिति कमजोर हो गई है।

एस.पी. वेलुमणि ने इस कदम को पार्टी के गौरव को बचाने की लड़ाई करार दिया है। उन्होंने कहा कि वे जयललिता के सिद्धांतों को जीवित रखना चाहते हैं और विजय की सरकार को समर्थन देना एक नई और स्वच्छ राजनीति की शुरुआत है। कल यानी बुधवार को होने वाले फ्लोर टेस्ट से पहले इस समर्थन ने विपक्षी खेमे में हलचल मचा दी है। जहाँ एक ओर ईपीएस गुट इसे विश्वासघात बता रहा है, वहीं दूसरी ओर षणमुगम गुट का दावा है कि असली एआईएडीएमके वही हैं जो डीएमके की नीतियों के विरुद्ध खड़े हैं।