भारत सरकार ने एक और उदारवादी नीति का फैसला लिया
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निजी निवेश को नई गति देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लिया है। सरकार ने अब वैश्विक पेंशन फंड और सॉवरेन वेल्थ फंड के लिए ग्रीनफील्ड टोल-रोड परियोजनाओं के लिए सीधी बोली लगाने के द्वार खोल दिए हैं। इस कदम का मुख्य लक्ष्य राजमार्ग निर्माण में निजी पूंजी के प्रवाह को बढ़ाना और सरकारी संसाधनों पर वित्तीय बोझ को कम करना है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर परियोजनाओं के लिए पात्रता मानदंडों में महत्वपूर्ण ढील दी है। इससे पहले, संस्थागत निवेशकों को इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए काफी जटिल प्रक्रियाओं और सख्त तकनीकी अनुभव की शर्तों से गुजरना पड़ता था। नए नियमों के तहत, अब बड़े वैश्विक फंड अपनी वित्तीय मजबूती का उपयोग करते हुए सीधे बोली लगा सकेंगे। निर्माण कार्य की तकनीकी बारीकियों को संभालने के लिए वे अनुभवी निर्माण कंपनियों (कन्स्ट्रक्शन फर्म्स) के साथ साझेदारी कर सकेंगे।
यह बदलाव भारतीय राजमार्ग क्षेत्र के वित्तपोषण मॉडल में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है। वर्तमान में, अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का निर्माण सरकार द्वारा ईपीसी या हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल के माध्यम से किया जा रहा है, जिसमें सरकारी धन का बड़ा हिस्सा खर्च होता है। सरकार अब राजमार्ग आवंटन में बीओटी परियोजनाओं की हिस्सेदारी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना चाहती है।
संस्थागत निवेशकों को सीधे आमंत्रित करने से न केवल पूंजी की कमी दूर होगी, बल्कि परियोजनाओं के रखरखाव और टोल संचालन में अंतरराष्ट्रीय स्तर की कार्यकुशलता भी आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उन लंबी अवधि के निवेशकों को आकर्षित करेगा जो स्थिर रिटर्न की तलाश में हैं। इस नीतिगत पहल के माध्यम से सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में हजारों किलोमीटर के नए एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों का निर्माण करना है, जिससे देश की आर्थिक विकास दर को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।