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ब्रह्मोस मिसाइल के उत्पादन में भारी गिरावट

ऑपरेशन सिंदूर के नायक पर अचानक मंडराने लगा संकट

  • असली वजह थोक तबादला है

  • हैदराबाद केंद्र सर्वाधिक प्रभावित

  • नौसेना के आधुनिकीकरण पर खतरा

राष्ट्रीय खबर

हैदराबादः ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद जहाँ पाकिस्तान में खौफ का माहौल था, वहीं अब भारतीय सेना के गौरव ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के उत्पादन को लेकर एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। एक साल के भीतर ही इस घातक हथियार के उत्पादन में 50 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है, जिसने केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय की चिंता बढ़ा दी है।

ब्रह्मोस मिसाइल के उत्पादन में आई इस गिरावट के पीछे किसी तकनीकी खराबी को नहीं, बल्कि प्रशासनिक उथल-पुथल को जिम्मेदार माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ब्रह्मोस एयरोस्पेस लिमिटेड ने हाल के महीनों में कम से कम 56 महत्वपूर्ण अधिकारियों और विशेषज्ञों का अलग-अलग केंद्रों पर तबादला कर दिया है। इस सामूहिक फेरबदल के कारण कर्मचारियों में भारी असंतोष पैदा हुआ और कई अनुभवी इंजीनियरों व तकनीशियनों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। विश्लेषकों का मानना है कि इसी आंतरिक खींचतान की वजह से उत्पादन प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है।

भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम वाली इस मिसाइल के मुख्य उत्पादन केंद्र हैदराबाद और लखनऊ में हैं। इसके अलावा नागपुर और पिलानी में भी इसके कलपुर्जे बनते हैं।

हैदराबाद यूनिट: यह सबसे पुराना और अनुभवी केंद्र है। यहाँ के मास्टर तकनीशियनों और सिस्टम इंजीनियरों को अचानक लखनऊ और पिलानी भेजने के निर्देश दिए गए। संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह तबादला तर्कहीन है। अनुभवी कार्यबल के हट जाने से हैदराबाद केंद्र की उत्पादन क्षमता आधी रह गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उत्पादन जल्द ही सामान्य नहीं हुआ, तो भारतीय नौसेना को हथियारों की आपूर्ति में बड़ी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, ब्रह्मोस एनजी (न्यू जनरेशन) जैसी अगली पीढ़ी की मिसाइलों का काम भी प्रभावित हो सकता है, जिन्हें विशेष रूप से मिग-29 और तेजस जैसे हल्के लड़ाकू विमानों के लिए डिजाइन किया जा रहा है। फिलहाल रक्षा मंत्रालय ने इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।