चीन पाकिस्तान के आर्थिक गलियारे के भविष्य पर संकट
एजेंसियां
ग्वादर, पाकिस्तानः चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की आधारशिला माने जाने वाले ग्वादर बंदरगाह परियोजना को एक बड़ा झटका लगा है। ग्वादर पोर्ट इकोसिस्टम के भीतर सक्रिय एक प्रमुख चीनी कंपनी ने 1 मई से अपने कारखाने का संचालन अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया है।
कंपनी ने इस कठोर निर्णय के पीछे प्रणालीगत बाधाओं और निष्पादन स्तर पर लगातार आ रही रुकावटों का हवाला दिया है। शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक आधिकारिक बयान में, कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह पाकिस्तान और चीन में अपने सभी कर्मचारियों को यह सूचित करने के लिए मजबूर है कि गैर-बाजार कारकों और परिचालन बाधाओं के कारण अब सामान्य संचालन को जारी रखना संभव नहीं रह गया है।
कंपनी के अनुसार, उसकी सुविधा ने चीनी सीमा शुल्क के कड़े निरीक्षण और संगरोध मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया था और वह अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं का भी पूर्णतः पालन कर रही थी। इसके बावजूद, कंपनी ने आरोप लगाया है कि सभी निर्यात मानकों को पूरा करने के बाद भी, व्यवहारिक रूप से परियोजना को आवश्यक स्वीकृतियां नहीं मिलीं, जिससे उसका निर्यात पूरी तरह से बाधित रहा। पिछले तीन महीनों से कंपनी संबंधित अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग कर रही थी और उच्च स्तरीय समन्वय के माध्यम से समाधान खोजने का प्रयास कर रही थी, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
इस गतिरोध की अवधि के दौरान, चीनी फर्म को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा है। इसमें कर्मचारियों का वेतन, अनुबंध संबंधी दंड, अत्यधिक बिजली शुल्क और बंदरगाह पर कंटेनरों के विलंब शुल्क शामिल हैं। हालांकि कंपनी ने नियामक निरीक्षण की आवश्यकता को स्वीकार किया, लेकिन उसने साफ तौर पर कहा कि अब चुनौतियां केवल तकनीकी अनुपालन तक सीमित नहीं रह गई हैं। बयान में कहा गया कि वर्तमान समस्याएं अब निष्पादन-स्तर की अनिश्चितताओं से जुड़ी हैं, जिन्हें सुलझाना किसी भी उद्यम के स्तर पर संभव नहीं है।
ग्वादर को सीपैक की फ्लैगशिप परियोजना बताते हुए, कंपनी ने उल्लेख किया कि उसने पहले ही कठिन रसद, सीमित उपयोगिताओं और अविकसित बुनियादी ढांचे जैसी बुनियादी समस्याओं पर विजय प्राप्त कर ली थी। लेकिन वर्तमान सिस्टमैटिक बैरियर ने काम करना असंभव बना दिया है। हालांकि, चीनी फर्म ने पाकिस्तान के योजना मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि उनका सहयोग चीन-पाकिस्तान मित्रता की भावना को दर्शाता है, फिर भी जमीनी हकीकत ने उन्हें ताला लगाने पर मजबूर कर दिया।