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नियमों को ताक पर रख दवा और उपकरणों की खरीद

रांची के सिविल सर्जन को जारी किया कारण बताओ नोटिस

  • उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं जमा हुआ है

  • ऑडिट रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है

  • गांव तक हुई है ऐसी अनियमितता

राष्ट्रीय खबरॉ

रांचीः झारखंड की राजधानी रांची में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। एक विशेष ऑडिट रिपोर्ट ने जिला स्वास्थ्य समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें टेंडर प्रक्रिया की अनदेखी कर करोड़ों रुपये की बंदरबांट की आशंका जताई गई है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एनएचएम के वित्त निदेशक ने रांची के सिविल सर्जन से स्पष्टीकरण (शोकॉज) मांगा है।

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए अनिवार्य टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। नियमों के मुताबिक, इतनी बड़ी राशि की खरीद के लिए ओपन टेंडर निकालना आवश्यक था, लेकिन अधिकारियों ने कोटेशन के जरिए 26.5 करोड़ रुपये से अधिक की सामग्री खरीद ली।

हैरानी की बात यह है कि इस खरीद की सूचना सार्वजनिक नोटिस बोर्ड तक पर नहीं दी गई। ऑडिट टीम ने जब भुगतान से संबंधित फाइलें मांगीं, तो जिला स्वास्थ्य समिति कोई भी दस्तावेज पेश करने में विफल रही। आशंका जताई जा रही है कि किसी खास समूह या व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से इस पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा गया।

गड़बड़ी केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं थी। रांची जिले के 18 में से 14 प्रखंडों के ऑडिट में पाया गया कि नियमों की धज्जियां प्रखंड स्तर पर भी उड़ी हैं। रातू, नामकुम, चान्हो और सदर अस्पताल रांची सहित 13 केंद्रों पर पूरी खरीद बिना टेंडर के की गई। 1025 ग्राम स्वास्थ्य समितियों और 241 उपकेंद्रों को लगभग 1.99 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। ऑडिट के दौरान इन खर्चों का कोई भी उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं मिल सका।

जननी सुरक्षा योजना में कागजी भुगतान भ्रष्टाचार की जड़ें जननी सुरक्षा योजना तक भी फैली मिलीं। ऑडिट के अनुसार, चान्हो, नामकुम और जिला अस्पताल में प्रसव के बाद महिलाओं को दी जाने वाली 1400 रुपये की सहायता राशि के वितरण में भारी विसंगतियां हैं। कागजों पर तो 5719 महिलाओं को लाभ देने के नाम पर 80 लाख रुपये से अधिक खर्च दिखाए गए हैं, लेकिन रिकॉर्ड में उन लाभार्थी महिलाओं के नाम और पते ही गायब हैं। यह सीधे तौर पर फर्जी भुगतान की ओर इशारा करता है।

रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने फिलहाल पल्ला झाड़ लिया है। उनका कहना है कि वे पिछले कुछ दिनों से बाहर थे और उन्हें शोकॉज लेटर की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि बिना पत्र देखे वे किसी भी तरह की टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं।