Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
WI vs SL Test: श्रीलंका की शर्मनाक हार से बदला WTC का समीकरण; भारतीय टीम को हुआ ये बड़ा फायदा Akshara Singh in Itha Movie: अक्षय कुमार के बाद अब श्रद्धा कपूर के साथ नजर आएंगी अक्षरा सिंह? वायरल ... Venezuela Earthquake: वेनेजुएला में भूकंप का तांडव, 1450 से ज्यादा मौतें; भारत ने शुरू किया 'ऑपरेशन ... LPG Gas Connection New Rules: अब एक घर में नहीं चलेगा LPG और PNG कनेक्शन; जानें सरकार का नया नियम Gmail का 'Undo Send' फीचर: गलत ईमेल भेजने की गलती अब होगी पल भर में ठीक Dry Eye Syndrome: आंखों में चुभन और खुजली को न करें नजरअंदाज; जानें डॉक्टर की सलाह और सही बचाव Delhi Voter List Update: दिल्ली में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण शुरू; 30 जून से घर-घर सत्यापन करे... Patna Coaching Dispute: खान सर की बढ़ीं मुश्किलें; पुलिस की नई केस डायरी में बॉडीगार्ड के हथियारों पर... Garh Ganesh Temple Ropeway: जयपुर के गढ़ गणेश मंदिर तक पहुंचना होगा आसान; 9 करोड़ की रोप-वे परियोजना क... Shivhar Fire News: बिहार के शिवहर में गैस सिलेंडर विस्फोट; 8 घर राख, 6 लोग झुलसे, 2 की हालत गंभीर

के कविता ने अपनी नई पार्टी का एलान किया

लंबे समय तक पार्टी से अलग किये जाने के बाद फैसला

  • इस नाम का रणनीतिक महत्व कायम

  • भावुक संबोधन और अधूरे सपने की चर्चा

  • बीआरएस और भाजपा पर प्रहार किया

राष्ट्रीय खबर

हैदराबाद: तेलंगाना की राजनीति में शनिवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) की पुत्री और पूर्व विधान परिषद सदस्य के. कविता ने अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की। उन्होंने आधिकारिक तौर पर अपनी नई पार्टी तेलंगाना राष्ट्र सेना (टीआरएस) के गठन की घोषणा की। यह घटनाक्रम कविता के लिए राजनीतिक पुनर्वास जैसा है, जिन्हें उनके पिता की पार्टी, भारत राष्ट्र समिति से पार्टी विरोधी गतिविधियों के गंभीर आरोपों में निलंबित कर दिया गया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के लिए ‘तेलंगाना राष्ट्र सेना‘ नाम का चयन बेहद सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। गौरतलब है कि बीआरएस का पुराना नाम ‘तेलंगाना राष्ट्र समिति’ था, जिसे राष्ट्रीय विस्तार की महत्वाकांक्षा के तहत केसीआर ने बदल दिया था। कविता ने उसी पुराने नाम की भावनाओं को फिर से जगाने की कोशिश की है, जो सीधे तौर पर अलग राज्य के आंदोलन से जुड़ा हुआ था।

हैदराबाद में पार्टी के झंडे का अनावरण करते हुए के. कविता काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि तेलंगाना राज्य के गठन को 12 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन जिन तीन स्तंभों— नीलू, निधुलु और नियमाकुलु (पानी, धन और नौकरियां)— पर राज्य आंदोलन की नींव रखी गई थी, वे आज भी अधूरे हैं। कविता ने आरोप लगाया कि वर्तमान और पूर्ववर्ती सरकारें युवाओं को रोजगार देने और किसानों के कल्याण में विफल रही हैं।

अपनी नई पार्टी के विजन को स्पष्ट करते हुए कविता ने बीआरएस और भाजपा दोनों पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में विपक्ष की भूमिका पूरी तरह विफल रही है। कविता ने बीआरएस पर कटाक्ष करते हुए कहा, वह क्षेत्रीय पार्टी अगले 1,000 सालों में भी अपने काम करने के तरीके नहीं बदलेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी बिना किसी जाति या धर्म के भेदभाव के, शासन को सीधे जनता के दरवाजे तक ले जाएगी।

के. कविता की नई पार्टी का मुख्य एजेंडा समावेशी विकास और आत्मनिर्भरता है। उन्होंने संकल्प लिया कि टीआरएस उन स्थानीय आकांक्षाओं को स्वर देगी जिन्हें मुख्यधारा की राजनीति में हाशिए पर धकेल दिया गया है। राज्य में विधानसभा चुनावों के निकट आते हुए, कविता का यह कदम तेलंगाना के सियासी समीकरणों को त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय बना सकता है, जिससे बीआरएस और कांग्रेस दोनों के वोट बैंक में सेंध लगने की संभावना है।