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27 लाख में से केवल 136 का निपटारा पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी सांसद से कहा हाईकोर्ट जाइये

  • कम निपटारे पर चिंता जाहिर की

  • कल्याण बनर्जी ने इसकी जानकारी दी

  • हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इसे सुनेंगे

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि यदि ट्रिब्यूनल में नामों के निपटारे को लेकर अदालती हस्तक्षेप की आवश्यकता है, तो याचिकाकर्ता कोलकाता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने मालदा के मोथाबाड़ी में न्यायाधीशों के घेराव की घटना में राष्ट्रीय जांच एजेंसी को चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति भी दे दी है।

शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष जब मामला सुनवाई के लिए आया, तो तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने दलील दी। उन्होंने ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, 27 लाख आवेदनों में से अब तक केवल 136 आवेदनों का ही निपटारा हो सका है। इस पर मुख्य न्यायाधीश कांत ने कहा कि इस विषय पर उचित राहत के लिए मामला कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल के पास ले जाया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल में गुरुवार को संपन्न हुए पहले चरण के मतदान का मुद्दा भी उठा। कल्याण बनर्जी ने अदालत को बताया कि इस बार 92 प्रतिशत मतदान हुआ है और प्रवासी मजदूर भी वोट देने के लिए विशेष रूप से राज्य लौटे हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 92 प्रतिशत मतदान को ऐतिहासिक करार दिया और छिटपुट घटनाओं को छोड़कर चुनाव के शांतिपूर्ण रहने का श्रेय केंद्रीय बलों के बेहतर समन्वय को दिया।

मुख्य न्यायाधीश कांत ने एक नागरिक के रूप में उच्च मतदान प्रतिशत पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जब लोग अपने वोट की ताकत समझते हैं, तो वे हिंसा का रास्ता छोड़ देते हैं। वहीं, न्यायमूर्ति बागची ने चुटकी लेते हुए टिप्पणी की, राजाओं के युद्ध में आम जनता पिसा करती है। सुनवाई के अंत में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब कल्याण बनर्जी ने चुनाव आयोग के वकील को 4 मई को रात्रिभोज (डिनर) के लिए आमंत्रित किया। संयोग से, उसी दिन चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने मजाकिया लहजे में कहा कि यदि वे पहले कोलकाता आए होते, तो उनकी मेजबानी की जिम्मेदारी स्वयं न्यायमूर्ति की होती।