आठ साल के बाद तीन दिवसीय यात्रा से कूटनीतिक सुधार
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग रविवार को अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे। पिछले आठ वर्षों से अधिक समय में किसी दक्षिण कोरियाई नेता की यह पहली भारत यात्रा है, जिसे कूटनीतिक हलकों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है।
जून 2025 में कार्यभार संभालने वाले राष्ट्रपति ली ने अपनी आधिकारिक व्यस्तताओं की शुरुआत करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। सोमवार को राष्ट्रपति भवन में उनके सम्मान में एक औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया गया। जिसके बाद वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए राजघाट गये।
इस यात्रा का मुख्य आकर्षण हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाला द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन होगा। इस उच्च-स्तरीय वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर निर्माण, रक्षा उत्पादन, हरित ऊर्जा और व्यापार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
दोनों नेता व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते की समीक्षा और उसे और अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा करेंगे। शिखर सम्मेलन के समापन पर एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी होने की संभावना है, जिसमें भविष्य के रोडमैप की घोषणा की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति ली भारत मंडपम में एक विशेष बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगे, जहाँ वे दोनों देशों के उद्योगपतियों से आर्थिक संबंधों को मजबूत करने का आह्वान करेंगे। अपनी यात्रा के अंतिम चरण में वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे।
उल्लेखनीय है कि भारत और दक्षिण कोरिया के संबंधों को 2015 में विशेष रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था। तब से दोनों देश विनिर्माण, उच्च तकनीक, बुनियादी ढांचे और रक्षा जैसे क्षेत्रों में एक-दूसरे के निकटतम सहयोगी बनकर उभरे हैं। ली जे-म्युंग की यह यात्रा न केवल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के साझा हितों को मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि तकनीकी और आर्थिक मोर्चे पर भारत की आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को भी गति देगी।