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अब एक ही तल पर होंगी जीवन रक्षक सुविधाएँ

झारखंड के स्वास्थ्य ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन

  • मरीजों को राहत देने की पहल

  • यहां वहां भटकना नहीं पड़ेगा

  • विशेषज्ञ समिति करेगी सिफारिश

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की नींव रखते हुए राज्य सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के कायाकल्प की एक व्यापक योजना तैयार की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल इमारतों का रंग-रोगन करना नहीं, बल्कि अस्पतालों की आंतरिक संरचना को पूरी तरह से पेशेंट-सेंट्रिक (मरीज-केंद्रित) बनाना है। स्वास्थ्य विभाग ने यह महसूस किया है कि चिकित्सा में तकनीक के साथ-साथ समय प्रबंधन भी जीवन बचाने के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है।

अस्पतालों के वर्तमान डिजाइन की कमियों को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति में रिम्स के अनुभवी चिकित्सक, बुनियादी ढांचा विशेषज्ञ और झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम के अधिकारी शामिल हैं। यह टीम राज्य के सभी निर्माणाधीन और वर्तमान में संचालित अस्पतालों के नक्शों की बारीकी से समीक्षा करेगी। विभाग का मानना है कि वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप डिजाइन न होने के कारण अक्सर मरीज और उनके परिजन अस्पताल के भीतर ही उलझ कर रह जाते हैं।

आपातकालीन चिकित्सा में गोल्डन आवर (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) की भूमिका सबसे अहम होती है। हालिया निरीक्षणों में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कई बड़े अस्पतालों में इमरजेंसी वार्ड कहीं और है, जबकि ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू दूसरी मंजिलों या दूरस्थ विंग्स में स्थित हैं। इस दूरी को कम करने के लिए अब पेशेंट फ्लो और वर्क फ्लो के वैश्विक सिद्धांतों को लागू किया जा रहा है।

इस नई योजना के तहत आईसीयू, ओटी, और इमरजेंसी सेवाओं को एक ही फ्लोर पर क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। डायग्नोस्टिक सेंटर और ब्लड बैंक को इमरजेंसी के करीब रखा जाएगा ताकि जांच रिपोर्ट के लिए घंटों इंतजार न करना पड़े। ट्रॉमा सेंटर को अनिवार्य रूप से मुख्य प्रवेश द्वार के पास भूतल पर रखा जाएगा, जिससे एम्बुलेंस सीधे स्ट्रेचर पॉइंट तक पहुंच सके।

अस्पताल जनित संक्रमण को रोकने के लिए स्टेराइल जोन की अवधारणा पर काम किया जा रहा है। अब अस्पतालों में मरीजों, चिकित्सा कर्मियों और बायो-मेडिकल वेस्ट (अस्पताल का कचरा) के आवागमन के लिए बिल्कुल अलग-अलग लिफ्ट और गलियारे (कोरिडोर) होंगे। इससे न केवल स्वच्छता बनी रहेगी, बल्कि अस्पताल के भीतर होने वाली भीड़भाड़ भी कम होगी। अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जो आने वाले समय में झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई ऊंचाई और विश्वसनीयता प्रदान करेगा।