सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया
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जनहित याचिका पर सुनाया है फैसला
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परिवार को मिले ठेकों की जांच की मांग
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दस वर्षों का लेखा जोखा दिया गया था
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार पर लगे उन आरोपों की जांच करने का आदेश दिया है, जिनमें कहा गया है कि उनके परिवार को 10 वर्षों के दौरान 1,270 करोड़ रुपये के अनुबंध प्राप्त हुए। शीर्ष अदालत ने सीबीआई को दो सप्ताह के भीतर जांच शुरू करने का निर्देश दिया और अरुणाचल प्रदेश सरकार को अनुबंध देने से संबंधित सभी दस्तावेज एजेंसी के समक्ष पेश करने का आदेश दिया।
अदालत ने सीबीआई को 16 सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए कहा, सीबीआई दो सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच शुरू करेगी। यह जांच और परिणामी जांच (यदि कोई हो), 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 की अवधि के दौरान सार्वजनिक कार्यों के निष्पादन, अनुबंधों और कार्य आदेशों को कवर करेगी। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश राज्य सीबीआई के साथ पूर्ण सहयोग करेगा और राज्य के मुख्य सचिव समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी नामित करेंगे ताकि कोई भी रिकॉर्ड नष्ट न हो।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना नामक संगठनों द्वारा दायर एक याचिका पर आया है। इस जनहित याचिका में पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों से जुड़ी फर्मों को सार्वजनिक कार्यों के अनुबंध दिए जाने की सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग की गई थी। याचिका में उनके दिवंगत पिता दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिनचिन ड्रेमा और उनके भतीजे त्सेरिंग ताशी को भी पक्षकार बनाया गया है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, रिनचिन ड्रेमा की फर्म ब्रांड ईगल्स को हितों के टकराव के बावजूद बड़ी संख्या में सरकारी अनुबंध मिले। याचिका में आगे तर्क दिया गया कि मुख्यमंत्री के परिवार और करीबी सहयोगियों से जुड़ी फर्मों को बार-बार बड़े पैमाने पर सार्वजनिक अनुबंध दिया जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि ऐसे निर्णय मुख्यमंत्री की जानकारी, सहमति या सक्रिय समर्थन के बिना संभव नहीं थे।