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बवाल होने के बाद पूर्व न्यायाधीश का नाम जोड़ा गया

मतदाता सूची से बारह लाख नाम हटाये गये

  • आंकड़ों का गणित और लंबित मामले

  • अंतिम तिथि आगामी छह अप्रैल तक है

  • सारे नामों का निपटारा होने पाने में शक

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नामांकन की अंतिम तिथि (6 अप्रैल) के करीब आते ही राज्य में मतदाता सूची को लेकर गहमागहमी और विवाद बढ़ गए हैं। निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार देर रात स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत दूसरी पूरक सूची जारी की, जिसमें करीब 12 लाख मामलों का निपटारा किया गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस सूची में शामिल नामों में से लगभग 40 प्रतिशत नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।

अब तक जारी की गई दो पूरक सूचियों में कुल 22 लाख मतदाताओं के नाम प्रकाशित किए जा चुके हैं। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों द्वारा अब तक कुल 37 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है। हालांकि, दूसरी सूची में केवल 12 लाख नाम ही सामने आए हैं। बाकी 15 लाख नामों के प्रकाशित न होने का मुख्य कारण डिजिटल हस्ताक्षर की कमी बताया जा रहा है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया, सूची में नाम तभी शामिल होते हैं जब निपटारा आदेश पर न्यायिक अधिकारी के ई-हस्ताक्षर हों। 29 लाख मामलों में से 19 लाख में यह हस्ताक्षर न होने के कारण पहली सूची छोटी रह गई थी। वर्तमान में लगभग 23 लाख मामले अब भी लंबित हैं, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या 6 अप्रैल तक सभी 60.06 लाख मामलों का निपटारा हो पाएगा।

मतदाता सूची में विसंगतियों का आलम यह है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश साहिदुल्लाह मुंशी का नाम भी विशेष गहन संशोधन के बाद हटा दिया गया था। मामले की जानकारी होने के बाद आनन फानन में उनके तथा उनके परिवार का नाम इस सूची में जोड़ा गया है। न्यायमूर्ति मुंशी ने इससे पहले नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, मुझे समझ नहीं आ रहा कि इस शिकायत के लिए अब किसके पास जाऊं। यदि प्रतिदिन 2 लाख मामलों का निपटारा होता है, तभी नामांकन की अंतिम तिथि तक प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इतनी जल्दबाजी में आम मतदाताओं के लिए कानूनी विकल्प चुनना चुनौतीपूर्ण होगा।