जहाजों और प्रवासियों की सुरक्षा प्राथमिकता
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्लीः 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद उपजे पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार ने बुधवार शाम 5 बजे संसद भवन में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू सहित अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य और जहाजों की सुरक्षा: सरकार ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से भारतीय जहाजों का आवागमन सुरक्षित है। इसे एक राजनयिक जीत बताते हुए कहा गया कि जहाँ कई देशों के जहाजों को बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, वहीं भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया गया है। चार और भारतीय जहाज जल्द ही इस मार्ग से भारत पहुँचने वाले हैं।
ऊर्जा सुरक्षा: पेट्रोलियम मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश में तेल, गैस या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। घरेलू गैस उत्पादन संकट से पहले के 28 प्रतिशत से बढ़कर अब लगभग 60 प्रतिशत हो गया है, जिससे बाहरी आपूर्ति झटकों पर निर्भरता कम हुई है।
सरकार ने दोहराया कि खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केवल ब्रीफिंग के बजाय संसद में इस मुद्दे पर औपचारिक बहस की मांग की।
असंतुष्टि: कांग्रेस नेता तारिक अनवर और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने सरकारी जवाबों को असंतोषजनक बताया। उन्होंने ईंधन की कीमतों और एलपीजी के लिए लगने वाली लाइनों पर चिंता व्यक्त की। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी केरल में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने बैठक का बहिष्कार किया। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही देश को हर चुनौती के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है और ईंधन, आपूर्ति श्रृंखला व उर्वरकों के लिए सात अधिकार प्राप्त समूह गठित किए हैं।