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CAPF Bill 2026: क्या है सीएपीएफ बिल और इसका विरोध क्यों हो रहा? जानें उन 3 बड़े प्रावधानों के बारे में जिनसे मचा है बवाल

संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में सोमवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पेश होना था.हालांकि यह विधेयक विपक्ष के विरोध के कारण पेश नहीं हो पाया है. विपक्षी पार्टियां खासतौर पर तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि बिल की कॉपी सांसदों को कम से कम 48 घंटे पहले नहीं दी गई, जो संसद के नियमों के खिलाफ है.

TMC सांसद डेरेक ओब्रायन ने सदन में इस मुद्दे को उठाया और कहा कि नियमों का पालन होना चाहिए. इसके बाद TMC समेत कई विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर दिया.

विपक्षी पार्टियों मे कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M) इन सभी ने कहा कि सरकार जल्दबाजी में कानून न बनाए. कानून बनाने से पहले उस पर विचार न करें. जल्दबाजी करने से कोई फायदा नहीं होगा.

विरोध के कारण नहीं हो पाया विधेयक पेश

संसद में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और वॉक आउट के सरकार ने फिलहाल बिल को पेश करने से रोक दिया. इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी नेताओं के साथ बैठक कर सहमति बनाने की कोशिश की. हालांकि अब यह कब पेश किया जाएगा. सरकार कोशिश में लगी हुई है कि विपक्ष को साथ लिया जाए, इसके साथ ही उनका विरोध कम किया जाए.

क्या है सरकार यह बिल?

सरकार ने किस विधेयक को पेश करने की कोशिश की थी. उसमें 5 केंद्रीय सुरक्षा बलों को एक ढांचे में लाने का प्रस्ताव करता है. इनमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल , इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस , सशस्त्र सीमा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में भर्ती, प्रमोशन और पोस्टिंग को एक जैसा बनाना है.

यह बिल पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद आया है. उस फैसले में कोर्ट ने केंद्र की उस अर्जी को खारिज कर दिया था जिसमें उसने अपने 2025 के फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की थी. उस फैसले में CAPF में IPS अधिकारियों के डेपुटेशन को कम करने और छह महीने के अंदर कैडर रिव्यू करने का निर्देश दिया गया था. लेकिन इस बिल में ऊंचे पदों पर IPS की नियुक्ति बढ़ाने का प्रावधान है, जिससे भी विवाद बढ़ सकता है.

सरकार ने क्या कहा?

सरकार ने बिल को पेश करने का फैसला टाल दिया. एक सीनियर मंत्री ने कहा कि कुछ मतभेद सामने आए हैं, जिन्हें सुलझाना जरूरी होगा. इसके तुरंत बाद, गृह मंत्री अमित शाह ने अलग-अलग विपक्षी पार्टियों के सांसदों के साथ एक मीटिंग बुलाई, जिसमें संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू भी शामिल हुए. इसके बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी विपक्षी नेताओं से मुलाकात की, जिनमें जयराम रमेश, जॉन ब्रिटास, सुप्रिया सुले और प्रमोद तिवारी शामिल थे, ताकि वे अपना रुख पक्का कर सकें.रंगपारा, मार्घेरिटा, नाहरकटिया और तिताबोर शामिल हैं.