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नासा के आर्टेमिस-2 मिशन की पूरी कहानी यहां विस्तार से समझें

  • समझें क्या है आर्टेमिस-2 मिशन?

  • चुने गए चार जांबाज अंतरिक्ष यात्री

  • भविष्य के मंगल अभियान की तैयारी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में साल 2026 एक स्वर्णिम अध्याय लिखने जा रहा है। लगभग 54 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, मानवता एक बार फिर चंद्रमा के करीब पहुँचने के बेहद करीब है। नासा का महत्वाकांक्षी आर्टेमिस-2 मिशन अब अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। विशालकाय स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट को केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड 39 बी  पर तैनात कर दिया गया है, जो अप्रैल 2026 में अपनी ऐतिहासिक उड़ान भरने के लिए तैयार है।

आर्टेमिस-2 नासा के उस बड़े कार्यक्रम का दूसरा चरण है, जिसका लक्ष्य चंद्रमा पर स्थायी मानवीय उपस्थिति दर्ज कराना है। जहाँ आर्टेमिस-1 एक मानवरहित परीक्षण उड़ान थी, वहीं आर्टेमिस-2 एक क्रूड मिशन है, यानी इसमें चार अंतरिक्ष यात्री सवार होंगे। ये यात्री चंद्रमा की सतह पर उतरेंगे नहीं, बल्कि चंद्रमा के चारों ओर एक फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टोरी का पालन करते हुए चक्कर लगाएंगे और पृथ्वी पर वापस लौटेंगे। यह मिशन लगभग 10 दिनों तक चलेगा।

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इस मिशन की कमान कमांडर रीड वाइसमैन के हाथों में है। उनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर (जो चंद्रमा के पास जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे), मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच (चंद्रमा मिशन पर जाने वाली पहली महिला), और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसन शामिल हैं। यह टीम ओरियन कैप्सूल के अंदर जीवन रक्षक प्रणालियों, संचार और नेविगेशन तकनीकों का गहन परीक्षण करेगी।

आर्टेमिस-2 मिशन के लिए इस्तेमाल होने वाला एसएलएस रॉकेट दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। यह ओरियन अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की निचली कक्षा से उठाकर चंद्रमा की ओर धकेलेगा। वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ओरियन के हीट शील्ड का परीक्षण करना है, क्योंकि वापसी के समय यह यान लगभग 40,000 किमी/घंटा की गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा, जिससे तापमान 2,800 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है।

आर्टेमिस-2 की सफलता ही आर्टेमिस-3 का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिसके तहत 2027-28 तक पहली बार किसी महिला और अश्वेत व्यक्ति को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। नासा का अंतिम लक्ष्य चंद्रमा को एक बेस कैंप के रूप में इस्तेमाल करना है, जहाँ से भविष्य में मंगल जैसे ग्रहों तक मानव मिशन भेजे जा सकें। यह मिशन केवल अमेरिका का नहीं, बल्कि पूरी मानवता का सामूहिक साहस है।

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