Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
भगवंत मान सरकार की अगुवाई में ‘ए.आई. क्रांति’ किसानों की आय बढ़ाकर पंजाब के भविष्य को सुरक्षित करेगी 'रॉयल एनफील्ड' छोड़ 'रॉयल सवारी' पर निकला बैंककर्मी! पेट्रोल नहीं मिला तो घोड़े पर बैठकर ऑफिस पहुंचा... रूह कंपा देने वाला हादसा! आंध्र प्रदेश में बस और ट्रक की जोरदार टक्कर, आग की लपटों में घिरकर 10 लोग ... पश्चिम बंगाल में बड़ा बदलाव! वोटर लिस्ट से एक साथ कटे 13 लाख नाम, जानें SIR के बाद अब क्या चल रहा है IPL 2026: तो ये खिलाड़ी करेगा CSK के लिए ओपनिंग! कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने खुद खोल दिया सबसे बड़ा रा... Operation Sindoor Film: बड़े पर्दे पर 'ऑपरेशन सिंदूर' की रियल स्टोरी दिखाएंगे विवेक अग्निहोत्री, नई ... Dividend Stock 2026: शेयर बाजार के निवेशकों की बल्ले-बल्ले! इस कंपनी ने किया 86 रुपये प्रति शेयर डिव... Jewar Airport ILS System: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कैसे काम करेगा ILS? पायलटों को मिलेगी ये बड़ी ... Chaitra Navratri Ashtami Bhog: अष्टमी पर मां महागौरी को लगाएं इस खास चीज का भोग, पूरी होगी हर मनोकाम... Baby Massage Oil: शिशु की मालिश के लिए बेस्ट 'लाल तेल' में कौन-कौन सी जड़ी-बूटियां होती हैं? जानें फ...

Crude Oil Price Surge: मिडिल ईस्ट तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी ऑयल कंपनियों को $60 बिलियन के फायदे की उम्मीद; भारत में बढ़ सकते हैं दाम

पूरी दुनिया इस वक्त एक गहरे ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ी है. 28 फरवरी से ईरान के इर्द-गिर्द शुरू हुए युद्ध ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है. लेकिन एक तरफ जहां दुनिया भर के देश और आम नागरिक इस संकट से सहमे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका की तेल उत्पादक कंपनियों के लिए यह टकराव एक बहुत बड़ा आर्थिक वरदान साबित हो रहा है.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल व्यापार का एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है, वहां हालिया विवाद के कारण भारी रुकावट आई है. यह वही रास्ता है जहां से दुनिया के कई देशों का कच्चा तेल गुजरता है. इस रास्ते के बाधित होने का सीधा सा मतलब है पेट्रोल और डीजल की कीमतों का रॉकेट की तरह ऊपर जाना. जब भी पेट्रोल या माल ढुलाई महंगी होती है, तो बाजार में मिलने वाली रोजमर्रा की हर चीज,चाहे वह सब्जी हो या राशन महंगी हो जाती है.

अमेरिकी कंपनियों के लिए ‘सोने की खान’

वैश्विक पटल पर एक देश का संकट अक्सर दूसरे के लिए व्यापारिक अवसर लेकर आता है. इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. ईरान से जुड़े इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को एक गंभीर झटका दिया है. लेकिन, अमेरिकी तेल कंपनियों के लिए यह स्थिति एक अभूतपूर्व मुनाफे का द्वार खोल चुकी है. जहां पूरी दुनिया तेल की किल्लत और आसमान छूती कीमतों से परेशान है, वहीं अमेरिकी उत्पादक इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं. उनका राजस्व तेजी से बढ़ रहा है और वे वैश्विक बाजार की इस घबराहट को एक बड़े वित्तीय लाभ में तब्दील कर चुके हैं.

तेल की कीमतों में 47 प्रतिशत का उछाल

अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्थिति की गंभीरता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 47 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है. पिछले सप्ताह ही अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ‘ब्रेंट क्रूड’ ने 100 डॉलर प्रति बैरल का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया. इसके साथ ही अमेरिकी मानक ‘वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट’ (WTI) भी 98.71 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर जा पहुंचा है. ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, निवेश बैंक ‘जेफरीज’ का अनुमान है कि केवल मार्च के महीने में ही अमेरिकी तेल उत्पादकों को हालिया मूल्य वृद्धि के कारण 5 अरब डॉलर का अतिरिक्त कैश फ्लो मिल सकता है.

60 अरब डॉलर का मुनाफा

कंपनियों का यह मुनाफा यहीं रुकने वाला नहीं है. अगर इस पूरे साल कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह 100 डॉलर के आसपास बनी रहती हैं, तो विशेषज्ञों का अनुमान है कि अमेरिकी तेल कंपनियों को 60 अरब डॉलर से ज्यादा का अप्रत्याशित लाभ हो सकता है. ‘रिस्टैड एनर्जी’ नामक रिसर्च फर्म के आकलन के अनुसार, अगर साल 2026 में कच्चे तेल का औसत मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल रहता है, तो अमेरिकी उत्पादकों के खजाने में 63.4 अरब डॉलर की अतिरिक्त नकदी आ सकती है.