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पहले चीन पर आरोप लगाये थे अब रूस की बारी आय़ी है

अमेरिकी ठिकानों की जानकारी रूस ही दे रहा है

रियादः हालिया खुफिया रिपोर्टों और वाशिंगटन पोस्ट के हवाले से आई खबरों ने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है। सूत्रों के अनुसार, रूस सक्रिय रूप से ईरान को ऐसी संवेदनशील खुफिया जानकारी प्रदान कर रहा है, जिससे तेहरान को मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, युद्धपोतों और विमानों को सटीक रूप से निशाना बनाने में मदद मिल सकती है।

यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध को एक सप्ताह से अधिक समय हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल युद्ध के दायरे को बढ़ाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि मॉस्को अब इस संघर्ष में परोक्ष रूप से शामिल हो गया है।

अमेरिकी खुफिया आकलन से परिचित अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रूस द्वारा साझा की गई जानकारी में क्षेत्र में सक्रिय अमेरिकी नौसेना के जहाजों और वायु सेना की गतिविधियों की सटीक लोकेशन शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस अपने उन्नत निगरानी उपग्रहों के नेटवर्क का उपयोग करके प्राप्त डेटा ईरान को सौंप रहा है।

यह सहयोग एक प्रकार की रणनीतिक पारस्परिकता के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पिछले चार वर्षों से यूक्रेन युद्ध में ईरान ने रूस को शाहिद ड्रोन और मिसाइल तकनीक प्रदान कर बड़ी मदद की है। अब जब ईरान खुद अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है, तो रूस उसे तकनीकी और खुफिया समर्थन देकर अपना कर्ज चुकाता दिख रहा है।

हालांकि, व्हाइट हाउस और पेंटागन ने इन रिपोर्टों के प्रभाव को कमतर बताने की कोशिश की है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक बयान में कहा कि रूस की इस मदद से अमेरिकी सैन्य अभियानों पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है, क्योंकि अमेरिकी सेना ईरानी सैन्य ढांचे को पूरी तरह से तबाह कर रही है।

वहीं, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक साक्षात्कार में विश्वास जताया कि अमेरिका की अपनी खुफिया क्षमताएं दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं और वे जानते हैं कि कौन किससे और क्या बात कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी कमांडर इन सभी खतरों को अपनी युद्ध योजनाओं में शामिल कर रहे हैं और अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है।

इस घटनाक्रम ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के लिए एक नई चुनौती पेश कर दी है। ट्रंप, जो एक तरफ रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए पुतिन के साथ सौदेबाजी की बात करते रहे हैं, अब उन्हें अपने उसी मित्र द्वारा अमेरिकी संपत्तियों के खिलाफ ईरान की मदद किए जाने की खबरों का सामना करना पड़ रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि रूस का यह खुफिया सहयोग जारी रहता है, तो यह मध्य पूर्व के युद्ध को एक बड़े प्रॉक्सि वॉर में बदल सकता है, जहाँ परमाणु शक्ति संपन्न दो महाशक्तियां—अमेरिका और रूस—एक-दूसरे के सीधे विरोध में खड़ी होंगी। यह स्थिति न केवल वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित करेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर खतरा पैदा करेगी।