बांग्लादेश लौटकर अपने परिवार से मिलेगा वह
कराचीः शाह आलम करीब तीन दशक पहले बांग्लादेश में अपने घर से एक छोटी सी यात्रा पर पाकिस्तान आए थे। लेकिन उस समय दोनों देशों के बीच बढ़ती कड़वाहट, कूटनीतिक तनाव और अपनी खराब आर्थिक स्थिति के कारण वह कराची जैसे विशाल महानगर में फंसकर रह गए। आज 60 साल की उम्र में, सूखे समुद्री भोजन बेचकर मामूली गुजारा करने वाले शाह आलम अपने जन्मस्थान लौटने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
एक लंबा और दर्दनाक इंतजार शाह आलम के लिए यह 30 साल का अंतराल बेहद पीड़ादायक रहा है। इस दौरान उन्होंने बांग्लादेश में अपने माता-पिता और अपनी पहली पत्नी को खो दिया, लेकिन वह उनके अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं हो सके। पाकिस्तान में दोबारा शादी करने और यहीं बसने के बावजूद, उनका दिल हमेशा अपनी जड़ों से जुड़ा रहा। वह बताते हैं, मेरी खेती की जमीन और पुश्तैनी घर सब वहीं है। मैं बस यहाँ फंस गया था।
बदलते कूटनीतिक हालात और नई उम्मीद पाकिस्तान और बांग्लादेश (जो 1971 तक एक ही देश थे) के बीच पिछले महीने 14 साल के लंबे अंतराल के बाद सीधी उड़ानें फिर से शुरू हुई हैं। 2024 में बांग्लादेश में छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद आए नए नेतृत्व ने दोनों देशों के जमे हुए रिश्तों में गर्माहट पैदा की है। इसी सुधार ने शाह आलम जैसे हजारों लोगों के लिए घर वापसी के रास्ते खोल दिए हैं।
कराची के प्रसिद्ध बंगाली मार्केट के पास सूखी मछलियां और झींगे बेचकर रोजाना 7 से 9 डॉलर कमाने वाले शाह आलम की आंखों में आंसू भर आते हैं जब वह अपनी योजना बताते हैं। उन्होंने कहा, मैं आर्थिक तंगी का सामना कर रहा हूं, लेकिन ईद-उल-अजहा के बाद अपने बेटे के साथ जरूर जाऊंगा। अब उनकी एकमात्र इच्छा बांग्लादेश में रह रहे अपने बड़े भाई और शादीशुदा बेटी से मिलने की है। शाह आलम की यह कहानी उन हजारों परिवारों का प्रतिनिधित्व करती है, जिन्हें राजनीति और सरहदों ने दशकों तक अपनों से दूर रखा।