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पांच हजार साल बैक्टीरिया एंटीबायोटिक प्रतिरोधक

रोमानिया की प्राचीन बर्फीली गुफा से मिला दबा हुआ सुपरबग

  • पूर्व की सोच को गलत साबित किया

  • प्राचीन काल में भी ऐसे विषाणु थे

  • पुरानी बर्फ पिघलने से बढ़ा खतरा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः विज्ञान की दुनिया में अक्सर यह माना जाता रहा है कि बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता आधुनिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग के कारण विकसित हुई है। लेकिन, फरवरी 2026 में रोमानिया की एक प्राचीन बर्फीली गुफा से प्राप्त शोध ने इस धारणा को चुनौती दे दी है।

वैज्ञानिकों को यहाँ बर्फ की गहराई में दबा हुआ 5,000 साल पुराना एक बैक्टीरिया मिला है, जो आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के लिए एक पहेली बन गया है। यह दरअसल उस वैज्ञानिक सिद्धांत को ही खारिज कर देता है, जिसमें यह माना गया था कि अत्यधिक दवाइयों ने विषाणुओं में प्रतिरोधक शक्ति विकसित कर दी है।

प्राचीन बर्फ से प्राचीन इतिहास का पता चलता है

यूरोपीय सूक्ष्मजीवविज्ञानी इस गुफा की बर्फ की परतों का अध्ययन कर रहे थे ताकि प्राचीन जलवायु परिवर्तन के पैटर्न को समझा जा सके। इसी दौरान उन्हें बैक्टीरिया का एक ऐसा स्ट्रेन मिला जो हजारों वर्षों से बाहरी दुनिया और आधुनिक दवाओं से पूरी तरह कटा हुआ था। प्रयोगशाला में जब इस बैक्टीरिया का परीक्षण किया गया, तो परिणाम चौंकाने वाले थे। यह प्राचीन बैक्टीरिया पेनिसिलिन और टेट्रासाइक्लिन जैसी कई आधुनिक एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति पहले से ही प्रतिरोधी था।

यह खोज इस बात का प्रमाण है कि बैक्टीरिया में रेजिस्टेंस जीन लाखों वर्षों से प्राकृतिक रूप से मौजूद हैं। यह कोई मानवीय आविष्कार नहीं, बल्कि प्रकृति की एक रक्षा प्रणाली है। यह स्पष्ट करता है कि मिट्टी और बर्फ में रहने वाले सूक्ष्मजीवों ने अन्य प्रतिस्पर्धी बैक्टीरिया से बचने के लिए खुद को बहुत पहले ही विकसित कर लिया था।

जैसे-जैसे ग्लोबल वार्मिंग के कारण दुनिया भर की पुरानी बर्फ पिघल रही है, वैसे-वैसे ऐसे प्राचीन बैक्टीरिया और वायरस बाहर आ सकते हैं जिनके खिलाफ हमारे पास कोई प्रभावी दवा नहीं है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस खोज से हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि बैक्टीरिया कैसे विकसित होते हैं, जिससे हम भविष्य में अधिक शक्तिशाली और प्रभावी एंटीबायोटिक्स बना सकेंगे।

इस प्राचीन सूक्ष्मजीव का अध्ययन अब पेलियो-माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के पास अभी भी ऐसे कई रहस्य हैं जो मानव अस्तित्व और स्वास्थ्य के लिए वरदान या चुनौती दोनों साबित हो सकते हैं।

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