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पेरिस में विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ा

पेंशन में सुधार और अन्य मांगों पर बढ़ी नाराजगी

पेरिसः फ्रांस में पेंशन की आयु सीमा बढ़ाने के निर्णय को लेकर असंतोष की आग एक बार फिर भड़क उठी है। पेरिस के ऐतिहासिक प्लेस डी ला रिपब्लिक और अन्य प्रमुख चौराहों पर प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा लगा हुआ है। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व फ्रांस के प्रमुख श्रमिक संघों द्वारा किया जा रहा है, जिनका तर्क है कि सरकार का यह कदम मध्यम और निम्न आय वर्ग के श्रमिकों के प्रति अन्यायपूर्ण है।

फ्रांस सरकार ने सेवानिवृत्ति की वैधानिक आयु को 62 से बढ़ाकर 64 वर्ष करने का कानून पारित किया है। सरकार का तर्क है कि देश की पेंशन प्रणाली को वित्तीय रूप से स्थिर रखने और भविष्य के घाटे से बचाने के लिए यह बदलाव अनिवार्य है। हालांकि, जनता का एक बड़ा हिस्सा इसे अपनी सामाजिक सुरक्षा पर हमला मान रहा है।

पिछले कुछ घंटों में पेरिस की सड़कों पर स्थिति गंभीर हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर कचरे के ढेरों में आग लगा दी और बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की। जवाब में, फ्रांसीसी दंगा पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई इन झड़पों में कुछ लोग घायल हुए हैं और दर्जनों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।

इस विरोध प्रदर्शन के कारण पेरिस की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली, विशेष रूप से मेट्रो और बस सेवाएं, बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में भी कामकाज ठप है। सॉलिडैरिटी के नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि सरकार इस कानून को तुरंत वापस ले, अन्यथा वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को तैयार हैं।

राष्ट्रपति मैक्रों के लिए यह स्थिति एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गई है। विपक्ष इस असंतोष का फायदा उठाते हुए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो फ्रांस की अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर इसका गहरा नकारात्मक असर पड़ सकता है। फिलहाल, पेरिस की सड़कों पर भारी पुलिस बल तैनात है और रात होने तक तनाव और बढ़ने की आशंका है।