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चुनाव से पहले ही भाजपा को बड़ा झटका लगा

ममता के मंच पर अनंत महाराज मौजूद

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ देखने को मिला है। भाजपा के राज्यसभा सांसद अनंत महाराज, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ देशप्रिय पार्क में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि दी, बल्कि मंच पर मुख्यमंत्री के ठीक बगल में आसन भी ग्रहण किया। इसी मंच से ममता बनर्जी ने राजबंशी समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान बंग विभूषण से सम्मानित किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले यह घटना भाजपा के लिए बड़ी फजीहत का कारण बन सकती है। मुख्यमंत्री ने स्वयं उन्हें उत्तरीय पहनाकर सम्मानित किया। हालांकि, सम्मान लेने के तुरंत बाद अनंत महाराज कार्यक्रम से विदा हो गए। ममता बनर्जी ने बताया कि उन्हें फ्लाइट पकड़नी है, इसलिए वे जल्दी जा रहे हैं। अपने संक्षिप्त संबोधन में अनंत महाराज ने राजबंशी भाषा में कविता पढ़ी और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

मंच से उतरने के बाद अनंत महाराज के सुर बदले हुए नजर आए। उन्होंने केंद्र सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि 1947 से ही राजबंशी समुदाय वंचना और तिरस्कार का शिकार रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा, भाजपा सांसद होने से क्या होगा? उन्होंने (भाजपा) हमारे लिए कुछ नहीं किया।

दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि बंगाल की संस्कृति सभी भाषाओं का सम्मान करती है और वे किसी भी सांप्रदायिक या विभाजनकारी शक्ति को इस विरासत को नष्ट नहीं करने देंगी। दिलचस्प बात यह है कि उनके द्वारा साझा की गई तस्वीरों में पहली तस्वीर अनंत महाराज को सम्मानित करने की ही थी।

इस घटनाक्रम पर भाजपा के भीतर खलबली तो है, लेकिन आधिकारिक तौर पर नेता इसे तवज्जो देने से बच रहे हैं। केंद्रीय मंत्री सुकान्त मजूमदार ने संक्षिप्त में कहा, राज्य सरकार ने सम्मान दिया, उन्होंने ले लिया। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनंत महाराज अलग राज्य (बंगाल विभाजन) की बात करते हैं, तो क्या तृणमूल कांग्रेस अब इसका समर्थन कर रही है?

वहीं, प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने इसे सामान्य बताते हुए कहा कि उनके सहकर्मी को सम्मान मिला, यह अच्छी बात है। यह पहली बार नहीं है जब अनंत महाराज और ममता बनर्जी की नजदीकियां दिखी हों। इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भी ममता उनके आवास पर गई थीं, जिससे उनके दलबदल की अटकलें तेज हो गई थीं।