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जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की पहली चीन यात्रा

अमेरिकी तेवर के बदलने से अब यूरोप में नया समीकरण

बर्लिन: यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ अगले सप्ताह अपनी पहली आधिकारिक चीन यात्रा पर रवाना होंगे। मई 2025 में कार्यभार संभालने के बाद मर्ज़ की यह पहली बीजिंग यात्रा है, जिसे वैश्विक राजनीति और बदलती विश्व व्यवस्था के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य एक ऐसी दुनिया में जर्मनी की स्थिति को मजबूत करना है जहाँ शक्तिशाली देश तेजी से अपना प्रभुत्व बढ़ा रहे हैं।

सरकारी प्रवक्ता सेबेस्टियन हिले के अनुसार, चांसलर मर्ज़ बुधवार को बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा, वह दक्षिण-पूर्वी चीन के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र हांग्जो का भी दौरा करेंगे। बर्लिन में पत्रकारों से बात करते हुए हिले ने स्पष्ट किया कि इस पूरी यात्रा का केंद्रीय विषय प्रतिस्पर्धा और सहयोग का सही संतुलन होगा। उन्होंने कहा, हम वहां सहयोग चाहते हैं जहां यह आवश्यक है और हमारे पारस्परिक हित में है।

जर्मनी के संघीय सांख्यिकीय कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, चीन एक बार फिर जर्मनी का सबसे बड़ा एकल व्यापारिक भागीदार बन गया है। पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 251.8 बिलियन यूरो (लगभग 297 बिलियन डॉलर) रहा। गौरतलब है कि 2016 से 2023 तक चीन शीर्ष पर था, लेकिन 2024 में अमेरिका ने उसकी जगह ले ली थी। अब एक बार फिर चीन ने अपना शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है, जबकि अमेरिका के साथ जर्मनी का व्यापार गिरकर 240.5 बिलियन यूरो पर आ गया है।

चांसलर मर्ज़ ने स्टटगार्ट में अपनी पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन के सम्मेलन में कहा कि जर्मनी को पूरी दुनिया के साथ व्यापारिक संबंधों की आवश्यकता है, जिसमें चीन भी शामिल है। उन्होंने घोषणा की कि वह एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ चीन जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि जर्मनी को चीन को लेकर किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए। मर्ज़ के अनुसार, चीन अपनी शर्तों पर एक नई बहुपक्षीय व्यवस्था बनाने का दावा करता है।

अपने संबोधन में मर्ज़ ने दोहराया कि पुरानी नियम-आधारित व्यवस्था अब अस्तित्व में नहीं है और महाशक्तियों की एक नई विश्व व्यवस्था बहुत तेजी से आकार ले रही है। उन्होंने जोर दिया कि यूरोप को आर्थिक और सैन्य रूप से मजबूत होने की जरूरत है ताकि वह वैश्विक मंच पर अपनी स्वायत्तता बनाए रख सके। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अप्रैल में चीन का दौरा करने वाले हैं।