पहले से हिंसाग्रस्त नाइजीरिया में फिर भीषण नरसंहार
अबूजाः नाइजीरिया के मध्य और उत्तरी हिस्सों में स्थित सुदूर गांवों में सशस्त्र हमलावरों द्वारा किए गए अलग-अलग हमलों में लगभग 200 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, निवासियों और पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बल अभी भी जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं और हमलावरों का पीछा कर रहे हैं। यह साल 2026 की अब तक की सबसे भीषण हिंसा मानी जा रही है।
मध्य नाइजीरिया के क्वारा राज्य में मंगलवार शाम को वोरो और नुकू समुदायों पर हमला हुआ। स्थानीय सांसद सैदू बाबा अहमद के अनुसार, इस हमले में कम से कम 170 लोगों की जान चली गई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बंदूकधारियों ने ग्रामीणों को घेर लिया, उनके हाथ पीछे बांधे और उन्हें कतार में खड़ा कर मौत के घाट उतार दिया। हमलावरों ने न केवल गोलियां चलाईं, बल्कि कई लोगों को उनके घरों के अंदर जिंदा जला दिया। दुकानों और घरों को आग के हवाले कर दिया गया, जिसके बाद डरे हुए ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए आसपास के जंगलों में भाग गए।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हमलावर लकुरावा नामक समूह से जुड़े हो सकते हैं, जो इस्लामिक स्टेट से संबद्ध माना जाता है। बताया जा रहा है कि इन आतंकवादियों ने पहले गांव में उपदेश दिया था और ग्रामीणों से नाइजीरियाई राज्य के प्रति अपनी निष्ठा त्याग कर शरिया (इस्लामी कानून) अपनाने की मांग की थी। जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, तो आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। मृतकों में गांव के मुख्य इमाम, एक स्कूल के प्रिंसिपल और कई बच्चे भी शामिल हैं।
कतसिना में टूटा शांति समझौता वहीं, उत्तरी कतसिना राज्य के दोमा गांव में हुए एक अन्य हमले में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई। हमलावर घर-घर जाकर लोगों को निशाना बना रहे थे। यह हमला इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि इसने उस छह महीने पुराने शांति समझौते को तोड़ दिया है, जो स्थानीय समुदाय और सशस्त्र गिरोहों के बीच हुआ था। नाइजीरिया के इन दूरदराज इलाकों में ग्रामीण अक्सर हमलावरों को पैसे और भोजन का भुगतान करते हैं ताकि वे उनके गांवों को निशाना न बनाएं।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और सुरक्षा चुनौतियां नाइजीरिया पर सुरक्षा बहाल करने का भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव है। पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाइजीरियाई सरकार पर ईसाइयों की सुरक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में, अमेरिकी सेना ने दिसंबर 2025 में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले भी किए थे। वर्तमान में, अमेरिका की एक छोटी सैन्य टीम खुफिया जानकारी जुटाने और नाइजीरियाई सेना की मदद के लिए तैनात की गई है। राष्ट्रपति बोला टीनुबू ने इस नरसंहार की कड़ी निंदा की है और क्वारा के कायामा क्षेत्र में एक सैन्य बटालियन भेजने का आदेश दिया है ताकि इन बर्बर आतंकवादियों का सफाया किया जा सके।