सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कठिन सवाल पूछा है
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से तीखा सवाल किया कि क्या जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक उन चार प्रमुख वीडियो को देख पाए हैं, जिन्हें अधिकारी उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत को सही ठहराने के लिए सबूत के तौर पर पेश कर रहे हैं। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान यह मामला तब गरमाया जब हिरासत के आधार और प्रक्रियाओं पर सवाल उठे।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को बताया कि अधिकारियों ने हिरासत का आदेश देने के लिए कुल 23 वीडियो का सहारा लिया है और ये सभी साक्ष्य श्री वांगचुक को सौंप दिए गए हैं। हालांकि, वांगचुक के वकीलों ने इस दावे का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि उन्हें दी गई पेन ड्राइव में चार महत्वपूर्ण वीडियो गायब थे और उन्होंने बार-बार अधिकारियों से इन्हें उपलब्ध कराने की मांग की है।
केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई कि वांगचुक की हिरासत ने एक संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में हिंसा को बढ़ने से रोका। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वांगचुक की चिकित्सा आधार पर रिहाई के प्रस्ताव का विरोध करते हुए उनके स्वास्थ्य संबंधी दावों को बनावटी और कृत्रिम करार दिया। सरकार ने वांगचुक को पूरी तरह से भारत विरोधी व्यक्ति बताते हुए उनकी तुलना महात्मा गांधी से किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई।
इससे पहले 11 फरवरी को अदालत ने वांगचुक के उन बयानों का उल्लेख किया था जिनमें उन्होंने अहिंसक संघर्ष के मार्ग से भटकने की आशंका पर चिंता व्यक्त की थी। अदालत ने उनके बयानों में गांधीवादी मूल्यों की झलक देखी थी, जिससे सरकार असहमत नजर आई।
लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद, सोनम वांगचुक पिछले साल 26 सितंबर से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई थी। उनकी पांच महीने की लंबी हिरासत अब न्यायिक समीक्षा के दायरे में है।