इस बार सुमात्रा द्वीप के निवासी डर के मारे घरों के बाहर निकले
जकार्ताः इंडोनेशिया का सुमात्रा द्वीप एक बार फिर कुदरत के कहर से दहल उठा है। आज भारतीय समयानुसार शाम के वक्त सुमात्रा के पश्चिमी तट पर रिक्टर पैमाने पर 7.1 तीव्रता का अत्यंत शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। इस भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके झटके न केवल सुमात्रा, बल्कि पड़ोसी द्वीपों और मुख्य भूमि के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए।
भूकंप का केंद्र समुद्र तल से लगभग 30 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था, जिसे भूवैज्ञानिक दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जाता है क्योंकि उथले केंद्र वाले भूकंप तटीय क्षेत्रों में अधिक तबाही मचाते हैं और सुनामी की संभावना को बढ़ा देते हैं।
जैसे ही भूकंप के पहले झटके महसूस हुए, सुमात्रा के तटीय शहरों में अफरा-तफरी मच गई। इंडोनेशिया के भूभौतिकी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, झटके इतने तीव्र थे कि कई बहुमंजिला इमारतों में गहरी दरारें आ गईं और पुरानी संरचनाएं ढह गईं। लोग अपने घरों और दफ्तरों को छोड़कर खाली मैदानों और सड़कों की ओर भागने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कंपन कई सेकंड तक जारी रहा, जिससे बिजली के खंभे गिर गए और कई इलाकों में ब्लैकआउट (बिजली गुल) की स्थिति पैदा हो गई। संचार नेटवर्क पूरी तरह से बाधित हो गया है, जिससे दूरदराज के द्वीपों से सूचनाएं प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है।
भूकंप के कुछ ही मिनटों के भीतर, पैसिफिक सुनामी चेतावनी केंद्र ने सुमात्रा और उसके आसपास के छोटे द्वीपों के लिए सुनामी का अलर्ट जारी कर दिया। समुद्र के जलस्तर में असामान्य हलचल देखी गई है, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों को तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने का सख्त निर्देश दिया है। मस्जिदों और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणालियों के माध्यम से लोगों को समुद्र तट से दूर जाने के लिए सचेत किया जा रहा है। अधिकारियों को डर है कि यदि समुद्र में ऊंची लहरें उठती हैं, तो यह 2004 जैसी त्रासदी की याद दिला सकती है।
इंडोनेशिया भौगोलिक रूप से प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर पर स्थित है। यह वह क्षेत्र है जहाँ टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती रहती हैं, जिसके कारण यहाँ दुनिया के सबसे अधिक भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं। 7.1 तीव्रता के भूकंप को बड़ा माना जाता है, जो बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुँचाने में सक्षम है।
इंडोनेशिया की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन राहत टीमें भेज दी हैं। प्राथमिकता घायल लोगों को सुरक्षित निकालने और अस्पतालों तक पहुँचाने की है। फिलहाल, सेना और स्थानीय स्वयंसेवक मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। सरकार ने अगले 24 से 48 घंटों के लिए हाई अलर्ट घोषित किया है क्योंकि मुख्य भूकंप के बाद आफ्टरशॉक्स आने की पूरी संभावना है, जो पहले से क्षतिग्रस्त इमारतों को गिरा सकते हैं। समुद्र के जलस्तर की निगरानी के लिए विशेष सेंसर और ड्रोन तैनात किए गए हैं ताकि सुनामी आने की स्थिति में समय रहते बचाव किया जा सके।