भाजपा ने अब सदन में जवाबी हमले की कार्रवाई शुरू की
-
विदेशी संबंधों का हवाला दिया गया
-
भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल
-
कांग्रेस ने कहा आत्मरक्षा का तरीका
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः संसद के भीतर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव एक नए स्तर पर पहुँच गया है। गुरुवार को भाजपा ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उनके खिलाफ एक सबस्टेंटिव मोशन पेश किया है। यह विधायी प्रक्रिया का वह साधन है जिसका उपयोग सदन में किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर औपचारिक चर्चा और निर्णय सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने की साजिश रच रहे हैं।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस प्रस्ताव का नोटिस देते हुए दावा किया कि राहुल गांधी सोरोस फाउंडेशन, फोर्ड फाउंडेशन और यूएसएआईडी जैसे विदेशी संगठनों के साथ जुड़े हुए हैं। दुबे ने आरोप लगाया कि गांधी ने थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम और अमेरिका जैसे देशों की यात्राएं कर भारत विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लिया है। नोटिस में कहा गया है कि राहुल गांधी ने संसद के पवित्र मंच का दुरुपयोग कर निर्वाचन आयोग और सर्वोच्च न्यायालय जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर बिना किसी सबूत के आधारहीन आरोप लगाए हैं, जिससे सरकार और देश की संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुँची है।
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की कार्यशैली को अनैतिक बताते हुए उन्हें उस ठग गैंग का मुख्य हिस्सा करार दिया, जिसका उद्देश्य भारत को भीतर से कमजोर करना है। संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए दुबे ने मांग की कि राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द की जानी चाहिए और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं, बल्कि एक सबस्टेंटिव मोशन है, ताकि उनके आचरण पर सदन में विस्तृत चर्चा हो सके।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया और सरकार का रुख दूसरी ओर, कांग्रेस ने इसे भाजपा की आत्मरक्षा की रणनीति करार दिया है। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी ने देश के सामने जो तथ्य रखे हैं, उनसे ध्यान भटकाने के लिए सरकार इस तरह के हथकंडे अपना रही है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल विशेषाधिकार प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन राहुल गांधी के भाषण के उन अंशों को रिकॉर्ड से हटाने की प्रक्रिया जारी रहेगी जिन्हें उन्होंने अब तक प्रमाणित नहीं किया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के संदर्भ में दिए गए बयानों पर मंत्री स्वयं जवाब देंगे।