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वियेना की बैठक के बाद तेहरान से सीधी चेतावनी

हमारे इंकार से पश्चिमी देशों को परेशानीः अराघची

तेहरानः ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में पश्चिमी शक्तियों, विशेषकर अमेरिका को एक कड़ा संदेश दिया है। ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और वाशिंगटन के साथ तनाव चरम पर है, अराघची का यह बयान ईरान की नई प्रतिरोध कूटनीति को परिभाषित करता है।

परमाणु बम बनाम संप्रभुता का तर्कअराघची ने अपने संबोधन में एक गहरा दार्शनिक और रणनीतिक तर्क पेश किया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी जगत ईरान के एक काल्पनिक परमाणु बम से भयभीत है, जबकि ईरान की वास्तविक शक्ति उसके शस्त्रागार में नहीं, बल्कि उसकी अटल इच्छाशक्ति में है। उन्होंने परमाणु बम शब्द का प्रयोग एक रूपक के तौर पर करते हुए स्पष्ट किया कि ईरान की सबसे बड़ी उपलब्धि बड़ी शक्तियों के दबाव के सामने न झुकना और अपनी शर्तों पर खड़े रहना है।

ईरान का तर्क है कि वह परमाणु हथियार बनाने के बजाय अपनी पारंपरिक सैन्य शक्ति और क्षेत्रीय प्रभाव को मजबूत करने पर केंद्रित है, जिसे वह अपनी सुरक्षा की वास्तविक गारंटी मानता है। भले ही ईरान आधिकारिक तौर पर परमाणु बम बनाने से इनकार करता है, लेकिन तकनीकी आंकड़े चिंताजनक बने हुए हैं। ईरान 60 प्रतिशत शुद्धता तक यूरेनियम का संवर्धन कर रहा है। वैज्ञानिक दृष्टि से, हथियारों के लिए आवश्यक 90 फीसद संवर्धन का स्तर यहाँ से बहुत दूर नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि ईरान के पास अब इतनी सामग्री है कि वह कम समय में कई परमाणु उपकरण तैयार कर सकता है, जो पश्चिमी देशों के लिए मुख्य चिंता का विषय है। अराघची का यह कड़ा रुख अकारण नहीं है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के कड़े रुख और अधिकतम दबाव की नीति के बीच ईरान अपनी सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाना चाहता है। पिछले साल ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए संदिग्ध हमलों ने तेहरान को अपनी सुरक्षा नीतियों को और अधिक आक्रामक बनाने पर मजबूर कर दिया है।

जहाँ एक ओर राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ओमान में हुई वार्ताओं को सकारात्मक बताकर कूटनीति के दरवाजे खुले रख रहे हैं, वहीं अराघची का बयान यह सुनिश्चित करता है कि ईरान किसी भी समझौते के लिए अपनी संप्रभुता का सौदा नहीं करेगा। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह बल की भाषा के बजाय समानता के आधार पर संवाद चाहता है। अब्बास अराघची का बयान घरेलू मोर्चे पर जनता का मनोबल बढ़ाने और वैश्विक मोर्चे पर यह संदेश देने के लिए है कि ईरान आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद झुकने वाला नहीं है। यह बयान आने वाले हफ्तों में होने वाली परमाणु वार्ताओं की दिशा तय करेगा।