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डॉलर के दबदबा को मिल रही चुनौतियों के बाद कार्रवाई

जी 7 देशों की डिजिटल करेंसी पर गुप्त बैठक

न्यूयार्कः दुनिया की सात सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (जी7) के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों के बीच हुई एक अघोषित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ने वैश्विक वित्तीय ढांचे में बड़े बदलावों के संकेत दिए हैं। लगभग तीन घंटे तक चली इस उच्च-स्तरीय बैठक का प्राथमिक उद्देश्य डिजिटल मुद्राओं के लिए एक वैश्विक नियामक ढांचा तैयार करना और सीमा पार भुगतान प्रणालियों में आमूलचूल परिवर्तन लाना था।

इस बैठक के केंद्र में चीन की डिजिटल युआन की बढ़ती वैश्विक पहुंच और उसका ब्याज-युक्त स्वरूप है। जी 7 देशों, विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय संघ को डर है कि यदि उन्होंने अपनी साझा डिजिटल मुद्रा नीति को गति नहीं दी, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर का प्रभुत्व कमजोर हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, जी 7 अब एक साझा डिजिटल प्रोटोकॉल विकसित करने पर सहमत हुए हैं, जो न केवल सुरक्षित होगा बल्कि मित्र राष्ट्रों के बीच धन के हस्तांतरण को तत्काल बना देगा।

हाल के महीनों में निजी क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन्स के कारण वैश्विक वित्तीय स्थिरता पर बढ़ते जोखिमों पर भी चर्चा की गई। जी 7 मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी डिजिटल संपत्ति को तब तक मुख्यधारा में अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक कि वह मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के सख्त मानकों को पूरा नहीं करती। बैठक में ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके एक पारदर्शी निगरानी प्रणाली बनाने पर सहमति बनी है, जिससे अवैध लेनदेन को ट्रैक करना आसान हो सके।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के प्रमुखों ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के नियम लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित होने चाहिए। इसका अर्थ है कि लेनदेन में गोपनीयता बनी रहे, लेकिन साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय अखंडता से कोई समझौता न हो। बैठक में आईएसओ 20022 जैसे नए मैसेजिंग मानकों को अपनाने पर भी चर्चा हुई, जो स्विफ्ट प्रणाली को और अधिक आधुनिक और डिजिटल मुद्राओं के अनुकूल बनाएगा।

इस बैठक के निष्कर्षों का सीधा असर फिनटेक कंपनियों और वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ना तय है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि G7 देश एक साझा नियामक ढांचे पर औपचारिक मुहर लगाते हैं, तो आने वाले समय में बिटकॉइन जैसी निजी क्रिप्टोकरेंसी के लिए नियम और कड़े हो जाएंगे, जबकि केंद्रीय बैंक द्वारा समर्थित डिजिटल मुद्राओं का चलन तेजी से बढ़ेगा।