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चुनाव के बीच ही प्राकृतिक आपदा से देश को परेशानी

पुर्तगाल में तूफान क्रिस्टिन से चुनाव पर आफत

लिस्बनः पुर्तगाल के लिए आज का दिन इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण दिनों में से एक बन गया है। जहाँ एक ओर देश अपने अगले राष्ट्रपति को चुनने के लिए दूसरे दौर के मतदान में व्यस्त था, वहीं तूफान क्रिस्टिन ने अटलांटिक की रानी कहे जाने वाले इस तटीय देश में भारी तबाही मचा दी है। 120 से 140 किमी प्रति घंटा की रफ्तार वाली हवाओं और समुद्र में उठीं 13 मीटर ऊँची लहरों ने चुनावी उत्साह को एक राष्ट्रीय आपातकाल में बदल दिया है।

लिस्बन और पोर्टो सहित पुर्तगाल के उत्तरी और मध्य तटीय जिलों में तूफान का सबसे भीषण असर देखा गया है। बिजली लाइनों के क्षतिग्रस्त होने से करीब 10 लाख लोग अंधेरे में हैं, जिससे डिजिटल वोटिंग और इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है। कई मतदान केंद्र, जो समुद्र के करीब थे, ज्वार के पानी में डूब गए हैं। चुनाव आयोग ने रिपोर्ट दी है कि लिस्बन के कुछ हिस्सों में मतदान केंद्रों पर पेड़ गिरने से कई कर्मचारी घायल हुए हैं, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से कई क्षेत्रों में मतदान अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है।

यह चुनाव न केवल मौसम के कारण, बल्कि राजनीतिक रूप से भी असाधारण है। पहले दौर में किसी को स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद, अब मुकाबला समाजवादी उम्मीदवार एंटोनियो जोस सेगुरो और दक्षिणपंथी लोकलुभावन नेता आंद्रे वेंचुरा के बीच है। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में सेगुरो को बढ़त मिली थी, लेकिन कम मतदान हमेशा परिणामों को उलट सकता है। वेंचुरा ने पूरे देश में चुनाव टालने की मांग की थी, जिसे प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने खारिज कर दिया, हालांकि स्थानीय स्तर पर देरी को मंजूरी दी गई है।

मौजूदा राष्ट्रपति मार्सेलो रीबेलो डी सूसा, जो अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं, ने बेलेम पैलेस में एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। पुर्तगाली चुनावी कानून के अनुसार, यदि किसी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा के कारण मतदान बाधित होता है, तो उसे अगले रविवार तक के लिए टाला जा सकता है। संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मतदान का प्रतिशत एक निश्चित स्तर से नीचे गिरता है, तो जनादेश की वैधता पर सवाल उठ सकते हैं।

पुर्तगाल इस समय एक नाजुक आर्थिक मोड़ पर है। तूफान से हुए नुकसान का शुरुआती अनुमान 4 बिलियन यूरो से अधिक लगाया गया है। सरकार ने पहले ही आपदा राहत के लिए बड़े पैकेज की घोषणा की है। ऐसे में, जो भी नया राष्ट्रपति चुना जाएगा, उसके सामने न केवल राजनीतिक स्थिरता बहाल करने की चुनौती होगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा बुनियादी ढांचा तैयार करने की भी जिम्मेदारी होगी।