मेदिनीपुर के जंगलों में हाथियों का तांडव जारी
राष्ट्रीय खबर
पुरुलियाः पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में हाथियों और मनुष्यों के बीच संघर्ष एक बार फिर हिंसक रूप ले चुका है। पिछले दो-तीन दिनों से इलाके के जंगलों में हाथियों का एक विशाल दल, जिसकी संख्या स्थानीय लोगों के अनुसार लगभग 100 तक हो सकती है, विचरण कर रहा है। रविवार तड़के नयाबसत रेंज के अंतर्गत गढ़बेता-3 ब्लॉक के मंगलपाड़ा गांव में एक दलछुट (झुंड से अलग हुए) दंतैल हाथी ने हमला कर दो ग्रामीणों को लहूलुहान कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घायलों की पहचान सुनील रम (55) और हिमांशु कारक (60) के रूप में हुई है। रविवार सुबह करीब 5 बजे सुनील अपने घर के पास स्थित आलू के खेत में पानी देने गए थे। तभी अचानक झाड़ियों से निकलकर एक दंतैल हाथी ने उन पर हमला कर दिया। सुनील ने भागने की कोशिश की, लेकिन हाथी ने उन्हें अपनी सूंड में लपेटकर दूर पटक दिया।
दूसरी ओर, पास के ही एक तालाब के पास गए हिमांशु कारक भी इसी दंतैल की चपेट में आ गए। दोनों घायलों को पहले स्थानीय शालबनी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें मेदिनीপুর मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रेफर कर दिया। फिलहाल दोनों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
हाथियों का उत्पात केवल हमलों तक सीमित नहीं है। शालबनी के कर्णगढ़ इलाके में रविवार भोर में हाथियों के एक दल ने जमकर तांडव मचाया, जिसमें कई मिट्टी के मकान ढह गए और फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है। स्थानीय निवासी पार्थ रम ने बताया कि जंगल के इतने करीब हाथियों की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
नयाबसत रेंज के वन अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वर्तमान में इस विशिष्ट क्षेत्र में 5 से 6 हाथी सक्रिय हैं, जबकि मुख्य झुंड थोड़ा दूर है। वन अधिकारी ने कहा, हमने ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए पहले ही सूचित किया था। हाथी के हमले में घायल हुए परिवारों को नियमानुसार हर संभव सहायता और मुआवजा प्रदान किया जाएगा। वन विभाग की टीमें हाथियों को वापस घने जंगल की ओर खदेड़ने के प्रयास में जुटी हुई हैं। समझा जा रहा है कि दलमा रेंज से नियमित तौर पर आने जाने वाले हाथियों का यह दल रास्ता भटककर इधर आ गया है वरना उनका अपना पारंपरिक हाथी गलियारा है, जो इनदिनों खदान के विस्फोटों की वजह से प्रभावित हो गया है।