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तीन सौ फीट नीचे गिरी बस, सत्रह मरे

पश्चिमी नेपाल में भीषण बस दुर्घटना

काठमांडुः पश्चिमी नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र में हुए उस हृदयविदारक बस हादसे से जुड़ी नई और दुखद जानकारियाँ सामने आ रही हैं। बचाव दल द्वारा रात भर चलाए गए गहन तलाशी अभियान के बाद अब स्थिति और अधिक स्पष्ट हुई है, जिसने पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश को और गहरा कर दिया है।

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, मरने वालों की संख्या 13 से बढ़कर अब 17 हो गई है। अस्पताल में उपचार के दौरान चार अन्य गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों ने दम तोड़ दिया, जिनमें दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं। बचाव दल को सुबह तड़के नदी के किनारे मलबे से दो और शव बरामद हुए हैं। घायलों की कुल संख्या अब 30 के पार पहुँच गई है, जिनमें से 8 लोगों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को बेहतर उपचार के लिए सेना के हेलीकॉप्टर के जरिए काठमांडू के विशेषज्ञ अस्पतालों में एयरलिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है।

प्रारंभिक तकनीकी जांच के बाद यह बात सामने आई है कि बस का ब्रेक फेल होना भी इस हादसे का एक बड़ा कारण हो सकता है। चश्मदीदों ने बताया कि मोड़ से ठीक पहले बस की गति असामान्य रूप से तेज हो गई थी और चालक लगातार हॉर्न बजा रहा था, जो इस बात का संकेत है कि वह वाहन पर नियंत्रण खो चुका था। साथ ही, बस के पुराने मॉडल और उसके खराब रखरखाव को लेकर भी स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल ने सुबह की पहली किरण के साथ ही दोबारा तलाशी अभियान शुरू किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई यात्री नदी के बहाव में तो नहीं बह गया। पहाड़ी ढलान इतनी खड़ी है कि क्रेन और भारी मशीनों को दुर्घटनास्थल तक पहुँचाना असंभव साबित हो रहा है, जिसके कारण बचावकर्मी हाथों और रस्सियों के सहारे बस के मलबे को काट रहे हैं।

इस अपडेटेड जानकारी के सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों में भारी रोष व्याप्त है। लोगों ने जिला प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सड़क सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उस तीव्र मोड़ पर मजबूत कंक्रीट बैरियर या क्रैश गार्ड लगे होते, तो बस को खाई में गिरने से रोका जा सकता था।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने न केवल मुआवजे की राशि बढ़ाने का संकेत दिया है, बल्कि इस विशिष्ट दुर्घटना की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन भी किया है। यह समिति सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी कि क्षमता से अधिक सवारी भरने की अनुमति किस चेक-पोस्ट पर दी गई और बस की फिटनेस जांच कब हुई थी।