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बाघ ने आठवें मवेशी को अपना शिकार बनाया

तेलंगना के जंगल के करीब के गांवों में बढ़ता आक्रोश

  • रघुनाथपल्ली इलाके में मौजूद था वह

  • नये इलाके की तलाश में भटक रहा है

  • आबादी वाले इलाकों के करीब आ रहा है

राष्ट्रीय खबर

हैदराबाद: तेलंगाना के जनगांव जिले में एक भटकते हुए बाघ का आतंक थमता नजर नहीं आ रहा है। शुक्रवार को इस बाघ ने रघुनाथपल्ली मंडल के मंडेलागुडेम गांव में अपने आठवें शिकार को अंजाम दिया। यह स्थान लिंगालाघनपुर मंडल के कुंदराम गांव से लगभग 20 किलोमीटर दूर है, जहां बाघ को पहले देखा गया था।

मंडेलागुडेम गांव के एक किसान पी. राजू ने बताया कि उन्होंने अपने खेत के पास बने पशु शेड में एक बछड़े को बांधा था, जिसे बाघ ने अपना शिकार बना लिया। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और बाघ के पदचिह्नों की जांच शुरू की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गांव के बुजुर्गों और स्थानीय पुलिस ने भी घटनास्थल का मुआयना किया।

बाघ को सुरक्षित रूप से जंगल में वापस भेजने के लिए वन विभाग ने अब बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है। इस ऑपरेशन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं। बाघ को ट्रैक करने और रेस्क्यू करने के लिए महाराष्ट्र से विशेष पशु ट्रैकर्स और बचाव विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है।अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चिंता बाघ का बदलता व्यवहार है। पिछले एक हफ्ते की तुलना में बाघ अब रात के समय 25 किलोमीटर तक की लंबी दूरी तय कर रहा है। बाघ लगातार नए और गैर-वन क्षेत्रों (आबादी वाले इलाकों) की ओर बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी डर का माहौल है।

वन विभाग वर्तमान में बाघ की गतिविधियों के आधार पर एक पुख्ता योजना बना रहा है ताकि उसे बिना किसी नुकसान के पकड़ा जा सके और इंसानी बस्तियों से दूर सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके। वैसे पहले से ही वन विभाग के प्रयास जारी होने के बाद भी बाघ पर काबू नहीं पाये जाने की वजह से इलाके के गांव के लोगों में अपनी अत्यधिक नाराजगी देखी जा रही है।छ