ईस्ट जयंतिया हिल्स में अवैध कोयला खनन पर कार्रवाई के निर्देश
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खदान के अंदर फंसे हैं पचास से ज्यादा लोग
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मणिपुर में सदन के पहले ही मच गया हंगामा
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धुबरी में नाव पलटने से तीन छात्र लापता
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटी : अवैध कोयला खदान में भीषण विस्फोट मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले के थांगस्कू इलाके में गुरुवार सुबह एक संदिग्ध अवैध कोयला खदान में जोरदार विस्फोट हुआ। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 10 मजदूरों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। जिला पुलिस अधीक्षक विकास कुमार के अनुसार, खदान के भीतर 50 से अधिक मजदूरों के फंसे होने की खबर है, जबकि एक घायल व्यक्ति को गंभीर स्थिति में शिलांग रेफर किया गया है।
प्रारंभिक जांच में यह गतिविधि अवैध पाई गई है। ज्ञात हो कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 2014 से ही मेघालय में रैट-होल माइनिंग पर प्रतिबंध लगा रखा है। हाल ही में जस्टिस बीपी कटाके कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इस जिले में बड़े पैमाने पर अवैध खनन जारी रहने की बात कही थी और अधिकारियों को सख्त निगरानी के निर्देश दिए थे। वर्तमान में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल बचाव अभियान में जुटा है, लेकिन खदान की गहराई और अनिश्चित स्थिति के कारण अभियान में चुनौतियां आ रही हैं।
मणिपुर में बुधवार को राष्ट्रपति शासन समाप्त होने के बाद नई सरकार का गठन हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के करीब एक साल बाद खेमचंद ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। खेमचंद को बीरेन सिंह की तुलना में एक मध्यमार्गी नेता माना जाता है, जिन्होंने शांति प्रयासों के लिए कुकी क्षेत्रों का दौरा भी किया था।
हालांकि, नई सरकार के गठन के साथ ही विरोध के स्वर भी तेज हो गए हैं। कुकी समुदाय से आने वाली नेमचा किपगेन को डिप्टी सीएम बनाए जाने के विरोध में कुकी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन जारी हैं। जॉइंट फोरम ऑफ सेवन ने शुक्रवार को कुकी बहुल इलाकों में 12 घंटे के बंद का आह्वान किया है। मैतई समुदाय द्वारा एसटी दर्जे की मांग और कुकी-नागा आदिवासियों के विरोध के बीच राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
असम के धुबरी जिले में गुरुवार को एक बड़ा हादसा हुआ, जहाँ गंगाधर नदी में 22 छात्रों को ले जा रही एक देसी नाव असंतुलित होकर पलट गई। ये छात्र एक पारंपरिक अंतिम संस्कार (श्राद्ध) में शामिल होकर बेलपारा चर से लौट रहे थे। हालांकि अधिकांश छात्र तैरकर बाहर निकल आए, लेकिन तीन छात्र—सहा आलम, मोफिदा और शर्मिन—तेज बहाव में बह गए। SDRF की टीमें गहन तलाशी अभियान चला रही हैं, लेकिन नदी की गहराई और शाम के वक्त कम दृश्यता (visibility) के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है।