आप नाहक एक व्यक्ति को जेल में क्यों रखना चाहते हैं
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पिछले सात महीने से जेल में बंद है
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ड्रग्स केस की जांच से जुड़ा मामला
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राज्य की याचिका पहले ही खारिज
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति के मामले में जमानत दे दी है। अदालत ने इस दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए पंजाब सरकार से पूछा कि वे मजीठिया को अभी भी जेल में क्यों रखना चाहते हैं, जबकि वे पिछले सात महीनों से हिरासत में हैं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मजीठिया की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के 4 दिसंबर के आदेश को चुनौती दी थी। अदालत ने जमानत देते हुए कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर गौर किया। पीठ ने स्पष्ट किया कि मजीठिया को पहले ही एनडीपीएस मामले में जमानत मिल चुकी है और राज्य सरकार द्वारा उस जमानत के खिलाफ दायर याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है।
अदालत ने कहा, इस मामले की परिस्थितियों, विशेष रूप से इस तथ्य को देखते हुए कि याचिकाकर्ता को 2022 के एनडीपीएस मामले में जमानत मिल चुकी है और वह पिछले सात महीनों से हिरासत में है, हम उसे जमानत देने के पक्ष में हैं। अदालत ने यह भी नोट किया कि यह मामला 2007-2017 की अवधि की संपत्तियों से संबंधित है और पुलिस की रिपोर्ट (चार्जशीट) पहले ही दाखिल की जा चुकी है।
मजीठिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एस. मुरलीधर ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताया। उन्होंने तर्क दिया कि इस मामले में 295 गवाह हैं, जिसके कारण निकट भविष्य में मुकदमा समाप्त होने की कोई संभावना नहीं है। दूसरी ओर, पंजाब सरकार के वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि आरोप गंभीर हैं और आय से अधिक संपत्ति का अनुमान लगभग 790 करोड़ रुपये है।
ज्ञात हो कि मजीठिया को पिछले साल जून में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने गिरफ्तार किया था। यह मामला 2021 के ड्रग्स केस की चल रही जांच से जुड़ा है। वर्तमान में मजीठिया पटियाला की नई नाभा जेल में बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को छूट दी है कि वह जमानत पर रिहा करते समय उन पर आवश्यक और कड़ी शर्तें लागू कर सकता है।