पश्चिम बंगाल में फिर चुनाव आयोग के खिलाफ माहौल
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के श्रीरामपुर में रविवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन की सुनवाई के लिए आए एक 60 वर्षीय वृद्ध की कथित तौर पर लंबी प्रतीक्षा और थकावट के कारण मृत्यु हो गई। इस घटना ने चुनाव आयोग की व्यवस्थाओं और राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मृतक की पहचान मोहम्मद सिराजुद्दीन के रूप में हुई है, जो रिशरा नगर पालिका के वार्ड नंबर 4 के निवासी थे। परिजनों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, सिराजुद्दीन को चुनाव आयोग की ओर से एसआईआर सुनवाई के लिए श्रीरामपुर स्थित एक शिविर में बुलाया गया था। परिवार का दावा है कि सिराजुद्दीन का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में पहले से ही दर्ज था, फिर भी उन्हें सत्यापन के लिए बुलाया गया, जो उनकी समझ से परे था। शनिवार को हुई इस सुनवाई के दौरान, सिराजुद्दीन दोपहर 1 बजे ही केंद्र पर पहुँच गए थे।
रिशरा नगर पालिका के वार्ड नंबर 4 के तृणमूल कांग्रेस पार्षद साकिल अली ने बताया कि वृद्ध व्यक्ति लगभग चार घंटे तक भीषण गर्मी और अव्यवस्था के बीच लाइन में खड़े रहे। आरोप है कि केंद्र पर बैठने की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी और न ही पीने के पानी की पर्याप्त सुविधा। शाम लगभग 5 बजे सिराजुद्दीन अचानक बीमार पड़ गए और जमीन पर गिर पड़े। उन्हें तत्काल श्रीरामपुर के वॉल्स अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हालांकि, उनकी मृत्यु के सटीक चिकित्सीय कारणों का पता लगाया जाना अभी बाकी है।
इस मौत की खबर फैलते ही तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। टीएमसी का आरोप है कि भारतीय निर्वाचन आयोग और भाजपा मिलकर मतदाता सूची संशोधन के नाम पर राज्य भर में भय और आतंक का माहौल पैदा कर रहे हैं। सत्तारूढ़ दल का दावा है कि अब तक इस प्रक्रिया के कारण होने वाले तनाव और अव्यवस्था की वजह से 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
स्थानीय पार्षद ने तीखे स्वर में कहा, एसआईआर के नाम पर आम लोगों का उत्पीड़न जारी है। अब तक लगभग डेढ़ सौ लोग अपनी जान गंवा चुके हैं! चुनाव आयोग को इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी ही होगी। टीएमसी का तर्क है कि जानबूझकर वृद्धों और वैध मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है ताकि उन्हें चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा जा सके।
दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा नेतृत्व का कहना है कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी हर प्राकृतिक या सामान्य मृत्यु को एसआईआर से जुड़ी मौत बताकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। फिलहाल, श्रीरामपुर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। यह घटना पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और नागरिक अधिकारों के बीच चल रहे बड़े संघर्ष का एक हिस्सा बन गई है।